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Yamuna Nagar News: करोड़ों के अस्पताल में थर्मामीटर तक नहीं

Wed, 09 Apr 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। एक तो मर्ज ने मरीजों को परेशान कर रखा है। वहीं रही सही कसर व्यवस्था ने पूरी कर दी है। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में इन दिनों हालात कुछ ऐसे ही हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो मरीज वार्ड में भर्ती हैं उनके शरीर का तापमान (बुखार) मापने के लिए अस्पताल में थर्मामीटर तक नहीं है।
मरीजों का आरोप है कि स्टाफ नर्स बिना बुखार मापे ही हर बार उन्हें दवाई दे जाती हैं। जब वह थर्मामीटर से चेकअप करने को कहते हैं तो जवाब मिलता है कि नहीं है। 105 करोड़ रुपये से बने चार मंजिला अस्पताल के ऐसे हालात ऐसे होंगे सुनने में ही अचंभा सा लगता है। लेकिन यह शत प्रतिशत सच है।
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टीम ने जिला नागरिक अस्पताल में जाकर दूसरे व तीसरे तल पर भर्ती मरीजों से बात की। महिला वार्ड में भर्ती मरीजों ने बताया कि स्टाफ नर्स हमेशा अभद्र व्यवहार करती हैं। किसी मरीज को यदि ग्लूकोज चढ़ रही हो और उसके खत्म होने पर नर्स को बुलाने जाती हैं तो वह आधा-पौना घंटा तक नहीं आती। वह कहती हैं कि खुद बंद कर लो, थोड़ी देर में आ रही हैं। ॉ
खाली बैठ कर बातें करती रहती हैं, लेकिन वार्ड में नहीं आती। बुखार होने पर वह नर्स से थर्मामीटर लगाकर चेकअप करने को कहती हैं तो जवाब मिलता है कि थर्मामीटर नहीं है। बुखार चाहे कितना भी हो एक गोली देकर चली जाती हैं। इसी दौरान स्टाफ नर्स अपने कमरों में गपशप करतीं दिखी। कोई देख न ले इसलिए दरवाजे बंद किए थे।
मरीजों ने बताया कि जो मरीज भर्ती हैं उनके बेड के पास डस्टबिन तक नहीं है। यदि किसी को अचानक उल्टी हो जाए तो वह कहां जाए। कई बार मरीज फर्श पर ही उल्टी कर देते हैं। जिस पर स्टाफ नर्स उन्हें भला-बुरा सुनाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रात को बेसहारा कुत्ते मरीजों के वार्ड में बिना किसी रोक-टोक के घूमते हैं। कुत्ते शौचालयों के पास रखे डस्टबीन से खून से सने बायोमेडिकल वेस्ट को उठाकर यहां से वहां घूमते रहते हैं।
मरीजों को डर रहता है कि कुत्ते उन्हें काट न लें इसलिए अपने वार्ड का अंदर से दरवाजा बंद करके रखते हैं। मरीजों के अनुसार दिन में केवल एक बार ही सफाई होती है। कुछ दिन पहले एक मरीज के हाथ से काफी खून निकल कर फर्श पर बिखर गया था। इसकी सफाई अगले ही दिन हुई थी।
शौचालयों की हालत खराब है। सफाई कर्मचारी ठीक से सफाई नहीं करते। ज्यादातर शौचालयों पर ताला लटका हुआ है। हालांकि मरीजों ने यह भी कहा कि थोड़ी गलती मरीजों की भी है, जो बच्चों के पैंपर, नैपकिन, सेनेटरी पैड व दवा की शीशी को ऐसे शौचालयों में फेंक देते हैं।
भर्ती महिला को दवा के लिए लाइन में लगाया
एक महिला मरीज ने बताया कि बीमारी की वजह से वह कई दिनों से महिला वार्ड में भर्ती है। उसके हाथ में कैनुला लगी हुई है। डॉक्टर ने राउंड के दौरान उसका चेकअप पर्ची में दवा लिख दी। परंतु वार्ड में भर्ती होने के बावजूद स्टाफ नर्स ने उसे दवा नहीं दी। स्टाफ नर्स ने उससे कहा कि उनके पास दवा नहीं है इसलिए वह दवा वितरण केंद्र पर जाकर दवाई ले आए। वह दूसरे तल से तीन बार सीढि़यों से उतर नीचे दवा लेने आई। परंतु लाइन इतनी लंबी थी कि दवा लेने की हिम्मत नहीं हुई।
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यदि वार्ड में थर्मामीटर भी नहीं है तो यह गलत बात है। अस्पताल में सारी दवाइयां उपलब्ध हैं। वार्ड में ही भर्ती मरीज को दवा मिलनी चाहिए। मैं खुद वार्डों का निरीक्षण करूंगी। मरीजों को ऐसी दिक्कत क्यों आ रही है. इसके लिए स्टाफ नर्सों से जवाब तलब किया जाएगा। - नवजोत किरन टिवाना, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर।
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