संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सर्दियों में अच्छी धूप निकल रही है। लोग धूप का आनंद लेने के लिए पार्कों में आ रहे हैं। इसके बावजूद पार्कों में बच्चों के लिए लगाए गए झूले वीरान हैं। इसकी वजह सर्दी नहीं बल्कि पार्कों में कुत्तों का आतंक है। पार्कों में लगाए गए झूलों के पास सारा दिन बेसहारा कुत्ते अपना डेरा लगाए रहते हैं।
बच्चों को कुत्तों के काटने का खौफ रहता है, इसलिए अभिभावक अपने बच्चों को न के बराबर ही पार्कों में लेकर जा रहे हैं। बच्चों नगर निगम के अधिकारियों की तरफ से कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। कुत्तों की नसबंदी करने का अभियान कई सालों से बंद है।
करीब पांच लाख की आबादी वाले शहर की लगभग सभी कॉलोनियों में क्षेत्रफल के हिसाब से पार्क हैं। शहर में नेहरू पार्क, ओपी जिंदल पार्क, भगत सिंह पार्क, महाराणा प्रताप पार्क, वीर हकीकत राय समेत अन्य पार्क ऐसे हैं जो बहुत बड़े हैं।
पार्कों में शहरवासी दिनभर अपने बच्चों के साथ घूमने के लिए आते हैं। वहीं बच्चों के लिए नगर निगम ने पार्कों में झूले भी लगा रखे हैं। ताकि वह इन पर खेल कर अपना तनाव दूर कर सकें। परंतु सर्दी में अच्छी खासी धूप होने के बावजूद बच्चे पार्कों में बच्चों के झूले खाली पड़े रहते हैं। बच्चे अपने घर के आंगन व छतों पर ही खेलने को मजबूर हो गए हैं।
मॉडल टाउन निवासी राजीव का कहना है कि शहर में बेसहारा कुत्तों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कई बार तो गलियों में इंसानों से ज्यादा कुत्ते ही नजर आते हैं। घर से न तो पैदल निकल सकते हैं और न ही बाइक पर। पता नहीं गली में खड़े कुत्ते कब पीछे दौड़ पड़ें। यदि आप कार के अंदर बैठे हैं तो कुत्तों से सुरक्षित हैं वरना नहीं।
वर्कशॉप रोड निवासी पवन का कहना है कि कई बार तो ऐसा देखा गया है जब कुत्ते गली में आराम से बैठे रहते हैं। परंतु जैसे ही उनके पास से कोई निकलता है तो कुत्ते अचानक पीछे दौड़ पड़ते हैं। इससे बाइक सवार भी हड़बड़ा कर नीचे गिर जाते हैं या फिर दूसरे वाहन से टकरा जाते हैं। नगर निगम के अधिकारी कुत्तों को न तो पकड़ते हैं और न ही इन्हें कहीं अलग से रखने का प्रबंध करते हैँ।