यमुनानगर। विलुप्त हो रही महाशीर मछली को संरक्षित रखा जा सके, इसके लिए दादूपुर हेड से 700 मीटर ऊपर और नीचे की तरफ अमादलपुर तक रिजर्व एरिया घोषित करने की तैयारी हो रही है। नहर के इस क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति मछलियों का शिकार नहीं कर सकेगा।
डेढ़ दशक पहले तक जिले की पश्चिमी यमुना नहर के पानी में महाशीर मछली अठखेलियां करती थी। इसे पकड़ने के लिए दादूपुर हेड के साथ लगती यमुना नहर में सरकार की तरफ से प्रतियोगिता तक कराई जाती थी। बदली परिस्थितियों और तापमान में हुई बढ़ोतरी की वजह से महाशीर मछली अब जिले में लगभग विलुप्त होने की कगार पर है।
महाशीर हिमाचल प्रदेश की राजकीय मछली है। यह बेहद मजबूत और फुर्तीली होती है। महाशीर मछली अपनी ताकत और फुर्ती के लिए जानी जाती है। महाशीर का मोटे तौर पर मतलब, माही- मछली और शेर- बाघ। इसलिए इसे मछलियों में बाघ भी कहा जाता है। हिमाचल से निकलने वाली यमुना नदी के प्रवाह में महाशीर हथिनीकुंड बैराज से होते हुए दादूपुर हेड तक आती थी। तापमान सामान्य होने के कारण महाशीर यहां प्रजनन करने के बाद वापस लौट जाती थी। हिमाचल प्रदेश से हरियाणा तक यमुना नदी पर बने बांध व अन्य गतिविधियों के चलते पानी में महाशीर की संख्या अब न के बराबर रह गई है।
नदी में रेत व प्रदूषण की मात्रा बढ़ना भी इसके कम होने का कारण बताया जा रहा है। बांध महाशीर के प्रजनन के लिए प्रवास में बाधा उत्पन्न करते हैं। धारा के निचले भाग में स्थितियां पूरी तरह बदल जाती है, क्योंकि पानी का बहाव कम हो जाता है। महाशीर प्रजनन के लिए झुंड में नदी की ऊपरी धाराओं की ओर प्रवास करती है। यह मछली दो मीटर तक लंबी और इसका वजन दो से 54 किलोग्राम तक हो सकता है। संवाद
नौ से घट कर 1.7 प्रतिशत रह गई हिस्सेदारी
वर्ष 1997-98 के दौरान यमुनानगर में नहर से जो मछली पकड़ी जाती थी उसमें महाशीर का हिस्सा नौ प्रतिशत होता था। जो अब घट कर महज 1.7 प्रतिशत रह गया है। नदियों में महाशीर समेत अन्य मछलियों की घटती संख्या को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नवंबर 2024 हरियाणा, उतराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश व दिल्ली सरकार से पूछा था कि इनके संरक्षण के लिए क्या किया जा सकता है। इसी कड़ी में दादूपुर हेड के साथ लगती पश्चिमी यमुना नहर में महाशीर समेत अन्य मछलियों के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की तैयारी हो रही है।
यमुनानगर में महाशीर मछली लगभग विलुप्त हो चुकी है। इसे बचाने के लिए दादूपुर हेड से 700 मीटर ऊपर व नीचे अमादलपुर तक करीब तीन किलोमीटर एरिया को रिजर्व रखने की तैयारी हो रही है। इस एरिया में मछली का शिकार नहीं किया जा सकेगा। - दिलबाग सिंह, जिला मत्स्य अधिकार, यमुनानगर।