हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में एक अमावस्या आती है, इस बार फाल्गुन माह की अमावस्या 20 फरवरी को है। इस दिन सोमवार होने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस साल फाल्गुन अमावस्या में कई विशेष योग बन रहे हैं जिससे इस दिन का महत्व और ज्यादा बढ़ जाएगा। यह कहना है गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक का।
कौशिक ने बताया कि साल 2023 की पहली सोमवती अमावस्या पर शिव योग बन रहा है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, ऐसे में इस बार फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, दान और तर्पण का विशेष फल मिलता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करने से घर में सुख-शांति आती है।
उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन सुबह उठकर नदी में स्नान करें। इसके बाद पूर्वजों को श्राद्ध कर्म करें। इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए पूजा के समय पितृ सूक्त या पितृ स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
कालसर्प दोष से राहत पाने के लिए भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर सकते हैं। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग को दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, शक्कर से स्नान कराएं और फिर पंचामृत बनाकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। इसके बाद 108 बार ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें और फिर सफेद फूल के साथ उन्हें जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से कालसर्प दोष का निवारण होता है।
उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या अमावस्या के दिन पितरों का अनादर न करें। स्नान के बाद पितरों को जल का तर्पण देना न भूलें। गाय, कौआ व कुत्ता आदि को दिए गए भोजन से पितरों को उसका अंश प्राप्त होता है। इस वजह से अमावस्या के दिन आप इन जीवों को कष्ट न पहुंचाएं। जो भी भोजन बनाएं, उसका एक हिस्सा इन जीवों को भी दे दें। अमावस्या के दिन पितर अतर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान आदि की प्रतीक्षा करते हैं। जब उनको वह प्राप्त नहीं होता है तो इससे वे दुखी होते हैं और श्राप दे देते हैं। अमावस्या के दिन मांस, मदिरा या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन न करें,इससे नकारात्मकता बढ़ती है। यह उन्नति में बाधक माने जाते हैं
अमावस्या तिथि शुरू -19 फरवरी शाम 04 बजकर 18 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त -20 फरवरी 2023 दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर
स्नान, दान का शुभ मुहूर्त -सुबह 07 बजे से 08 बजकर 25 मिनट तक
पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट तक
शिव योग- 20 फरवरी सुबह 11 बजकर 3 मिनट से 21 फरवरी सुबह 6 बजकर 57 मिनट तक