संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गंगा दशहरा पर बाड़ी माजरा विसर्जन घाट पर सहारनपुर से आए एक परिवार के छह लोग पश्चिमी यमुना नहर में स्नान करने के दौरान पानी के तेज बहाव से डूबने से बचा लिए गए। आठ लोगों के परिवार दो महिलाएं, दो पुरुष सहित चार बच्चे जिनमें दो लड़के और दो लड़कियां शामिल थी। स्नान के दौरान इस परिवार के तीन महिलाएं और दो पुरुष सहित चार सदस्य पानी में डूब गए।
शोर सुनकर बचाव के लिए मंदिर के पुजारी पंडित माध्वानंद और उनकी पत्नी सरस्वती ने नहर में डुबकी लगा दी, लेकिन वो भी पानी के बहाव में बह गए। बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर दो गोताखोर तुरंत मदद के लिए पहुंचे और एक-एक कर सभी डूबने वाले को सकुशल बाहर निकाला गया। महिला कविता का स्नान करने के दौरान पानी में दम घुटने पर उसे प्राइवेट अस्पताल से चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
सहारनपुर निवासी 30 वर्षीय युवती नेहा ने बताया कि वह गंगादशहरा पर स्नान करने के लिए यमुनानगर आजाद नगर में अपने रिश्तेदार के पास आए थे। यहां से वे स्नान करने के लिए बाड़ी माजरा विसर्जन घाट पर पहुंचे। स्नान के लिए सबसे पहले वह खुद यमुना उतरी थी। उसे लगा कि घाट के पास ज्यादा गहराई नहीं होगी। ऐसे में ग्रिल को क्रॉस कर आगे चली गई, किंतु पानी का बहाव तेज होने के चलते खुद को संभाल नहीं पाई और डूबने लगी। उसे डूबता देख बेटे अक्षित ने बचाने का प्रयास किया। उसे बाहर निकाल लिया गया। लेकिन नेहा को बचाने के लिए उतरी कविता और परिवार के अन्य दो पुरुष भी डूबने लगे।
शोर सुनकर मंदिर के पुजारी पंडित माध्वानंद ने छलांग लगा दी, परंतु वह भी डूबने लगे, पति को डूबता देख सरस्वती ने उन्हें साड़ी का पल्लु फेंका लेकर डूबने के चलते पंडित उसे पकड़ न सके। इस पर सरस्वती ने नहर में छलांग लगा दी और डूबने लगी। तभी पंडित के बेटे राजेश शुक्ला ने गोताखोर राजीव व सुखराम की मदद से सभी को बाहर निकाला गया