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साढ़े पांच घंटे बिजली ने रुलाया

Thu, 28 Nov 2013 05:15 PM IST
यमुनानगर
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बिजली के तारों से साढ़े पांच घंटे तक गायब रहे करेंट ने आधे जगाधरी शहर और बुड़िया के बाशिंदों को प्रभावित किया। इससे जहां घरों में दैनिक कार्यों पर ब्रेक लगा रहा, वहीं मेटल और अन्य फैक्टरियों में उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। यह लंबा कट खेड़ा पावर हाउस में मेंटेनेंस वर्क के कारण लगाया गया।
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गुलाब नगर सब पावर स्टेशन के तहत आने वाले 10 फीडरों में सुबह 9:30 बजे से दोपहर तीन बजे तक बिजली गुल रही। इस पावर सब स्टेशन के तहत बुड़िया, केसर नगर, द्वारिकापुरी, गुलाब नगर, समता योग आश्रम, मुखर्जी पार्क, नरेंद्रा, डिस्ट्रिक जेल, जय सिटी और यमुना कैल्शियम फीडर आते हैं।

बिजली निगम के मुताबिक गुलाब नगर सब स्टेशन के तहत करीब 20 हजार बिजली उपभोक्ता और करीब 300 स्माल स्केल इंडस्ट्रीज हैं। आधे से अधिक जगाधरी शहर और बुड़िया की बिजली सप्लाई इसी सब पावर स्टेशन से होती है। बिजली गुल रहने से घरों में बिजली उपकरणों पर आधारित कामकाज नहीं कर पाईं, वहीं दोपहर को नलकूप न चल पाने से पानी की किल्लत भी रही।
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 बिजली किल्लत न होने के बावजूद जगाधरी में लंबे बिजली कट लगते रहे हैं। जर्जर तारों के टूटने और ट्रांसफार्मरों पर ओवर लोड से आए-दिन बिजली सप्लाई बाधित होती है। बुधवार को लगे लंबे कट का कारण खेड़ा पावर हाउस में मेंटेनेंस वर्क बताया जा रहा है। जगाधरी के हनुमान गेट निवासी महेश शर्मा, राकेश शर्मा, मुनीष महेंद्र, रवि, कमल और अक्षय का कहना है कि जगाधरी में रोज-रोज लंबे बिजली के कट लगते हैं। इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए बिजली निगम को बिजली सप्लाई व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।

फैक्टरी मालिकों और मजदूरों को लगी चपत
जगाधरी में बर्तनों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। गुलाब नगर सब पावर स्टेशन के अधीन करीब 300 मेटल फैक्टरियां हैं। इनमें बिजली से चलने वाली भट्टियां हैं। बिजली गुल होने पर भट्टियों में गलाई जाने वाली धातु ठंडी हो जाती है। दोबारा भट्टी चलाने पर जहां अधिक ईंधन लगता है, साथ ही घंटों बाद बिजली आने से लेबर का खर्च भी डबल हो जाता है, वहीं ठेके पर काम करने वाले मजदूरों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लंबे कटों से उत्पादन पर भी खासा प्रभाव पड़ता है। जगाधरी में घर-घर में बर्तनों की रगड़ाई और पॉलिश का काम भी होता है, जो बिजली पर ही आधारित है। इस कार्य को करने वालों को आम भाषा में ठठेरे कहा जाता है। सैकड़ों ठठेरों के घरों में परिवार के सभी सदस्य बर्तनों की रगड़ाई और पॉलिश में लगे रहते हैं। बुधवार को बिजली गुल रहने से इन ठठेरों की एक दिन की कमाई डूब गई।

फैक्टरियों के लिए नहीं है अलग फीडर
जगाधरी की मेटल इंडस्ट्री को अर्बन फीडरों से बिजली सप्लाई की जाती है। इसके लिए अलग से इंडस्ट्री फीडर नहीं है। अर्बन में कट लगने पर फैक्टरियों में मशीनें बंद हो जाती हैं। इस कारण फैक्टरी मालिक लंबे समय से बर्तन इंडस्ट्री के लिए अलग से इंडस्ट्री फीडर बनाने की मांग कर रहे हैं।

बार-बार के कटों से प्रभावित हो रहा बर्तन उद्योग
द जगाधरी मेटल मैन्यूफैक्चर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सुंदर लाल बतरा का कहना है कि बर्तन इंडस्ट्री के लिए अलग फीडर न होने के कारण बार-बार लगने वाले लंबों कटों से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है। स्माल स्केल इंडस्ट्री में प्रतिदिन दो से पांच लाख रुपये का माल तैयार होता है। बुधवार को गुलाब नगर सब पावर स्टेशन में साढ़े पांच घंटे तक लगे कट के कारण करीब छह करोड़ के बर्तन नहीं बन पाए।
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