छछरौली। चार दिन पहले उफान पर आई सोम नदी अब शांत है, लेकिन पानी से हुई तबाही के मंजर अब दिखने लगे हैं। बाढ़ के पानी से आई गाद खेतों में जम चुकी, इससे किसानों को और नुकसान हो सकता है। लेकिन जिन खेतों में बिना गाद जमा पानी आगे निकल चुका, वहां किसान दोबारा से धान की रोपाई कर रहे हैं।
वहीं आसमान में छाए बादलों को देखकर किसान इस बात को लेकर चिंता में भी हैं कहीं फिर से सोम नदी उफान पर आ गई तो उन्हें और अधिक नुकसान हो सकता है। वहीं उधर, बलौली माजरा के पास से निकल रही पथराला नदी की पटरी को टूटे चार से पांच दिन हो गए, लेकिन उसे अभी तक ठीक किया गया, इससे किसानों में काफी रोष है।
किसान राजीव, गगनदीप, अजमेर, सोहन, संजीव व केहर सिंह ने बताया कि सोम नदी के उफान पर आने के बाद क्षेत्र के करीब 200 एकड़ से भी ज्यादा फसल को पानी ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया था। जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान धान की रोपाई किए गए ताजा खेतों में हुआ था।
बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई मिट्टी ने धान की पौध को पूरी तरह से मिट्टी में धंसा दिया था। उन्होंने कहा कि सरकारें तो हमेशा से ही किसानों को बाढ़ के पानी से हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की बातें करती आई है पर इन बातों पर अमली जामा आज तक किसी भी सरकार ने नहीं पहनाया है। संवाद
पटरी ठीक न होने से नुकसान अधिक संभावना
किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि बलौली माजरा गांव के पास से निकल रही पथराला नदी की पटरी टूटे हुए को पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे दुरुस्त नहीं किया गया। ऐसे में पानी बलौली माजरा, डमौली, तारुवाला, हड़ौली इत्यादि गांवों की तरफ आ रहा है। गांव में पानी जमा चुका है, ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।