संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें साध्वी नीलम भारती ने जीवन में गुरु के वचनों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र भी गुरु के वचनों का महत्व बताते हैं।
उन्होंने कहा कि हर शब्द का अपना महत्व होता है। शब्द की अपनी ऊर्जा है। एक साधारण व्यक्ति द्वारा कहे शब्द केवल सुनने वाले को सीमित स्तर तक ही प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन वो शब्द जो दिव्य अलौकिक स्रोत से जुड़े हुए व्यक्तित्व द्वारा कहे जाएं तो उनके भीतर प्रकृति के सभी नियमों को बदल देने का सामर्थ होता है।
साध्वी ने कहा कि जब निराकार ब्रह्म धरती पर हमारे जैसा मनुष्य बनकर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए धरती पर अवतरित होता है, तब उसके द्वारा कहा गया हर शब्द दिव्य व अलौकिक होता है। उन्हें गुरु वचन की संज्ञा दी जाती है। वह परमात्म शक्ति जन्म व मृत्यु से परे होते हुए भी हमारे कल्याण के लिए सीमित दायरे में बंध जाती है, लेकिन उसकी असीम शक्तियों का स्तर व सामर्थ्य पूर्ण रूप से क्रियाशील रहता है।
गुरु के वचनों में शिष्य के मृत्यु योग तक को काटने का सामर्थ्य होता है, क्योंकि गुरु के वचन केवल शब्द नहीं होते बल्कि वे संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति को संजोए हुए ऊर्जा पुंज होते हैं। गुरु के वचनों का उल्लंघन करने का सामर्थ्य इस संपूर्ण सृष्टि में किसी के पास भी नहीं है, लेकिन एक शिष्य गुरु के अस्तित्व को साधारण समझते हुए कभी अपनी बुद्धि और मन के दायरे में उलझ कर गुरु वचनों का उल्लंघन कर देता है।
इससे गुरु की क्षति नहीं, अपितु स्वयं शिष्य की आत्मा का पतन हो जाता है। गुरु के वचन सदैव शिष्य के लिए हितकारी होते हैं। गुरु के वचनों में परम कल्याण छिपा है, क्योंकि गुरु की दृष्टि केवल वर्तमान पर नहीं बल्कि कालातीत है। जब गुरु शिष्य को वचनों द्वारा कोई संदेश देते हैं तो वह शिष्य के भूत, भविष्य, वर्तमान को देखकर ही दिया जाता है। शिष्य सदैव गुरु वचनों के सुरक्षा कवच में बंधा रहे तो उसको इस लोक में और परलोक में भी कभी अहित नहीं हो सकता।