जगाधरी। जिले के अधिकतर निजी स्कूलों में दाखिले शुरू हो गए हैं। स्कूलों में इन दिनों बच्चों का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों की भारी भीड़ लगी है। वहीं, नये सत्र में स्कूलों ने स्कूलों ने ट्यूशन फीस में मामूली वृद्धि दिखाकर अन्य खर्चों में वृद्धि कर दी है। अभिभावक चाह कर भी इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं। स्कूलों की फीस वृद्धि की जानकारी शिक्षा निदेशालय के पास भी नहीं है। शिक्षा निदेशालय की ओर से अभी तक फीस वृद्धि के लिए भरा जाने वाला फार्म-6 का पोर्टल अभी तक नहीं खोला है। पोर्टल न खुलने से स्कूलों की मौज हो गई है। स्कूलों ने दस से 20 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि कर दी है। जिसका असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है।
इस बार निदेशालय की ओर से पोर्टल खोलने में काफी देर कर दी है। जबकि हर साल दिसंबर तक पोर्टल खुल जाता है और स्कूलों से फार्म-6 के आवेदन मांगे जाते हैं। परंतु अब नया सत्र शुरू होने में चार दिन शेष हैं और निदेशालय ने पोर्टल नहीं खोला है। इससे स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है, चूंकि जब तक पोर्टल खुलेगा और प्रक्रिया शुरू होगी, सभी स्कूलों में दाखिले हो चुके होंगे। हालांकि पोर्टल न खुलने की स्थिति में स्कूल ऑफलाइन फार्म-6 दे सकते हैं, लेकिन किसी स्कूल ने ऐसा नहीं किया गया है। जबकि कई स्कूलों ने फीस स्वयं से बढ़ा दी है। छोटे बच्चों के दाखिले तो दो सप्ताह पहले ही होने लगे थे, वहीं अब बड़ी कक्षाओं के दाखिले किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कि स्कूलों को फीस वृद्धि के लिए फार्म-6 भर शिक्षा निदेशालय को देना होता है। जिसमें स्कूलों को उनकी फीस संबंधी पूरी जानकारी देनी होती है। इस फार्म में सभी स्कूलों की ट्यूशन फीस, भवन शुल्क सहित अन्य सुविधाओं के लिए जाने वाले तमाम शुल्क की जानकारी होती है लेकिन ऑनलाइन फार्म में देरी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। दाखिला करवाने पहुंचे अभिभावकों को मौखिक रूप से फीस वृद्धि की जानकारी दी जा रही है।
अभिभावक ललित शर्मा, राजकुमार, सतेंद्र, प्रमोद कुमार, उमेश कुमार, रोहित, मोहित ने कहा कि निदेशालय ने इसमें काफी देरी कर दी है। यह कार्य पहले ही पूरा कर लेना चाहिए था। अभी इसमें देर हो गई है तो निदेशालय की ओर से इसके लिए जिला विभाग को निर्देश दिए जाने चाहिए। स्कूलों के आदेश जारी किए जाने चाहिए, ताकि अभिभावकों की जेब खाली न हो। बता दें कि दाखिले से पहले निदेशालय की ओर से स्कूलों को फार्म-6 भरकर देने के आदेश दिए जाते हैं। हर साल स्कूल इसमें देरी करते हैं और इसे लेकर कई स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। परंतु इस बार निदेशालय की देरी से स्कूल संचालक खुश हैं। चूंकि स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने वाला विभाग ही लचर व सुस्त रवैया अपनाए हुए हैं। जिले में करीब 400 छोटे बड़े निजी स्कूल हैं, जिसमें करीब 90 बड़े स्कूल हैं। जिसमें बच्चों का दाखिला करवाने की लोगों में भारी होड़ रहती है।
वर्जन
स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए फार्म-6 भर कर देना होता है। कोई भी स्कूल अपनी मर्जी मुताबिक फीस नहीं बढ़ा सकता है। विभाग का ऑनलाइन फार्म-6 पोर्टल नहीं खुला है। ऐसे में स्कूल पुराने फीस पर ही दाखिले कर सकते हैं। यदि किसी स्कूल ने बिना अनुमति के फीस बढ़ाई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक ऐसी शिकायत लेकर उनसे कार्यालय में कर सकते हैं।
-धर्मेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।