संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के कई गांव डार्क जोन में जा चुके हैं। इन गांवों लगातार भूजल का स्तर नीचे जा रहा है। पानी की एक-एक बूंद को सहेज कर रखा जा सके इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं जल व स्वच्छता विभाग ग्राम पंचायतों केजनप्रतिनिधियों को पानी बचाने के लिए प्रशिक्षित करेगा।
इसके तहत सभी सरपंचों, पंचों, ग्राम सचिव व पंचायती राज विभाग के जेई को पानी बचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण लेने के बाद वह अपने-अपने गांवों में लोगाें को जल बचाने के लिए जागरूक करेंगे। ग्रामीण पेयजल योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए पंचायती राज सदस्यों को प्रशिक्षण देने की शुरूआत जिले के खंड छछरौली से होगी।
सात जनवरी को छछरौली के कम्युनिटी सेंटर में छछरौली ब्लॉक की 34 ग्राम पंचायत के सरपंचों, पंचों, ग्राम सचिव, पंचायत विभाग के जूनियर इंजीनियर एवं जिला पार्षद को बताया जाएगा कि पानी को कैसे बचाना है। साथ ही एक बार इस्तेमाल हो चुके पानी का दोबारा कैसे प्रयोग करना है इसकी भी जानकारी दी जाएगी।
वहीं पानी की शुद्धता कैसे जांची जाती है इसके लिए विभाग के केमिस्ट मौके पर मौजूद रहें। बाकी की 34 पंचायतों को अगले दिन आठ जनवरी को इसी तरह से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद साढौरा, बिलासपुर, रादौर, सरस्वतीनगर, जगाधरी समेत अन्य खंडों के लोगों को भी पानी बचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिले में कुल 490 ग्राम पंचायत हैं। ट्रेनिंग के बाद सभी को पानी की शुद्धता को जांचने के लिए फील्ड टेस्टिंग किट्स भी निशुल्क वितरित की जाएंगी। साथ ही विभाग ने बुक लेट दी जाएंगी।
पानी व्यर्थ बहने से रोकना होगा : रजनी
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं जल व स्वच्छता विभाग की जिला सलाहकार रजनी गोयल ने बताया कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह पानी को व्यर्थ बहाना है। इसके लिए लोगों में जागरूकता का अभाव है। ऐसे में सभी को जल के महत्व का पता होना जरूरी है। इसलिए जन प्रतिनिधि जागरूक होंगे तभी वह आगे किसी को इसके बारे में बता पाएंगे। यही वजह है कि पहले पंचायती राज विभाग के जनप्रतिनिधियों को जल बचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद वह अपने गांवों में कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करेंगे।