बिजली निगम की ओर से जिले में अब भी वर्षों पुराने और आडे़-तिरछे लोहे के खंभों के जरिए ही बिजली आपूर्ति की जा रही है।
निगम की यह जुगाड़ की नीति हादसों का सबब बन रही है। वीरवार को भी शहर के औद्योगिक क्षेत्र में बारिश के बाद भीगे लोहे के खंभे में आए करेंट से एक बेजुबान बैल की मौत हो गई और उसे बचाने गया किशोर झटका लगने से सड़क पर दूर जा गिरा।
इससे पहले भी लोहे के खंभों के गिरने और बरसात के दिनों में उनमें करेंट आने से कई छुटपुट हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद निगम खंभों को बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है
गौरतलब है कि वर्ष-2012 में बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों में बिजली निगम अधिकारियों को लोहे के खंभों के स्थान पर सीमेंट के खंभे लगाने के आदेश दिए थे।
इस पर बिजली निगम ने टीमों का गठन कर लोहे के खंभों को चिह्नित भी किया, लेकिन बाद में यह आदेश फाइलों की कागजी कार्रवाई में ही सिमटकर रह गए।
बिजली निगम अब भी हजारों लोहे के खंभों के सहारे बिजली आपूर्ति कर रहा है। लोहे के खंभों में करेंट से हादसे की आशंका बनी रहती है। यह सब जानकर भी निगम लोहे के खंभों को बदलने की जहमत नहीं उठा रहा है।
अमर उजाला ने किया था आगाह
लोहे के खंभों को बदलने के आदेशों पर बिजली निगम के उदासीन रवैये पर अमर उजाला ने 14 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित की थी।
इसमें जिले में लोहे के वर्षों पुराने जर्जर हो चुके लोहे के खंभों के गिरने और बरसात के दिनों में उनमें करेंट आने पर हादसा होने के खतरे के प्रति आगाह किया गया था।
फिर भी बिजली निगम ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की। विभाग की इसी लापरवाही से वीरवार को को शहर के औद्योगिक क्षेत्र में लगे लोहे के खंभे में करेंट आने से एक बेजुबान बैल की मौत हो गई, जबकि उसे बचाते समय गांधीनगर फाटक के समीप शिव नगर में हने वाला दीपक झटका खाकर दूर जा गिरा।