संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में वीरवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ले ली। आसमान में बादल गरजने लगे और बिजली चमकने के साथ हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। सुबह करीब 10 बजे के बाद बारिश तेज हुई तो अनाज मंडियों में खुले में रखा धान भीग गया।
जिले की मंडियों में अभी भी करीब 30 हजार मीट्रिक टन धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। कई जगह तिरपाल उपलब्ध नहीं होने के कारण धान को ढका नहीं जा सका। कुछ स्थानों पर बोरियों के ऊपर तिरपाल होने के बावजूद नीचे से बारिश का पानी धान तक पहुंचता रहा। इससे मंडियों में धान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जिले की सभी 13 अनाज मंडियों में अब तक 3,40,992 एमटी धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 3,21,809 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। वहीं, 2,72,148 एमटी धान का उठान हुआ है, जो कुल खरीद का 84.57 प्रतिशत है। अभी 68,844 एमटी धान का उठान होना बाकी है। इसमें से करीब 30 हजार एमटी से ज्यादा धान खुले में पड़ा होने के कारण बारिश के दौरान भीगने का खतरा बना हुआ है।
वीरवार को मंडियों में धान की आवक लगभग न के बराबर रही। किसानों के अनुसार, अब तक 95 प्रतिशत से अधिक धान की कटाई हो चुकी है और मंडियों में आवक भी काफी कम हो गई है। इसके बावजूद खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने कहा कि मंडियों में धान की आवक कम होने के बावजूद फसल की सुरक्षा के उचित प्रबंध नहीं हैं। दिखावे के लिए बोरियों के ऊपर तिरपाल डाल दी जाती है, लेकिन नीचे से बारिश का पानी रिसकर धान तक पहुंच जाता है। कई जगह तिरपाल नहीं होने के कारण धान खुले में पड़ा रहता है।
मार्केट कमेटी जगाधरी सचिव मोहित बेरी ने बताया कि मौसम खराब होने की आशंका को देखते हुए खुले में रखे धान को पहले ही तिरपाल से ढक दिया गया था। मंडियों में धान पूरी तरह सुरक्षित है और बारिश से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। धान को अच्छी तरह सुखाने के बाद ही उठान किया जाता है।
जगाधरी अनाज मंडी में तिरपाल से ढकी धान से भरी बोरियां। संवाद