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Yamuna Nagar News: दवा घोटाले की जांच कमेटी पर उठे सवाल

Mon, 23 Jun 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। टीबी मरीजों के लिए खरीदी गई दवा में घोटाले के आरोपों की जांच पूरी हो गई। जांच कमेटी में शामिल तीन में से दो डिप्टी सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में शिकायत को झूठा, निराधार और बहकावे में आकर दी गई बताया। वहीं टीबी की दवा खरीदने में लगे घोटाले के आरोपों की जांच करने के लिए बनाई गई कमेटी पर शिकायतकर्ता बलविंद्र सिंह ने सवाल खड़े किए हैं।
बलविंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सर्जन पर लगे आरोपों की जांच उनसे जूनियर डिप्टी सर्जन कैसे कर सकते हैं। वहीं जूनियर डॉक्टर अपने सीनियर के खिलाफ निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। इस पर बलविंद्र सिंह ने एक बार फिर सीएम विंडो पर शिकायत दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि सीएम विंडो पर दी गई शिकायत का मजाक बनाया जा रहा है। उन्होंने सिविल सर्जन पर जांच को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए।
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चौधरी कॉलोनी निवासी बलविंद्र सिंह ने सीएम विंडो पर दी शिकायत में कहा कि उनकी शिकायत का मजाक बनाया जा रहा है, क्योंकि टीबी मरीजों के लिए खरीदी गई दवा में घोटाले के आरोप सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. अनूप गोयल पर थे। उनकी शिकायत जांच के लिए उन्हीं सिविल सर्जन को भेज दी गई, जिन पर आरोप है।
सिविल सर्जन ने खुद अपने विरुद्ध जांच के लिए अपने से जूनियर अधिकारियों तीन डिप्टी सिविल सर्जन की टीम गठित कर दी। क्या सिविल सर्जन के विरुद्ध शिकायत की जांच उनसे जूनियर अधिकारी कर सकते हैं। सरकारी दिशा निर्देशों अनुसार यदि आरोपी ए ग्रुप का अधिकारी है तो उससे दो पे स्केल सीनियर अधिकारी ही उसकी जांच कर सकते है।
यमुनानगर में तो सिविल सर्जन की जांच उप सिविल सर्जन करके क्लीन चिट देने का काम करते हैं। बलविंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि उनकी शिकायत पर स्वास्थ्य महानिदेशक को डायरेक्टर स्तर या उनसे सीनियर स्तर के अधिकारी से जांच करवाने के आदेश जारी करें। साथ ही मंजीत सिंह के यमुनानगर के सिविल सर्जन के अतिरिक्त कार्यभार के आदेश निरस्त करने के आदेश दिए जाएं।
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18.50 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप

बलविंद्र सिंह ने सीएम विंडो पर शिकायत दी थी कि जिले के टीबी मरीजों के लिए सरकारी दवाइयां होने के बावजूद बिना अनुमति बाहर से करीब 18.50 लाख रुपये की दवाइयां खरीदी गई। अगले दिन वेयरहाउस की ओर से भी टीबी की दवाइयां जिले में भेज दी गई। इसमें घोटाला करते हुए सरकारी रिकॉर्ड में सारी दवाइयों की खपत दिखा दी गई। वहीं जिले में इतने टीबी के मरीज नहीं हैं, जितनी दवाइयों की खपत दिखाई गई। बलविंद्र सिंह ने इसका आरोप सिविल सर्जन मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप गोयल पर लगाया है। इस मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला, डॉ. सुशीला सैनी व डॉ. संजय राठी की टीम का गठन किया था। जब कमेटी का गठन हुआ तो उसी दौरान डॉ. सुशीला सैनी छुट्टी पर चली गई थीं।
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