संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। संपत्ति कर की रिकवरी में नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी पर दोहरी नीति अपनाने के आरोप लग रहे हैं।बकायेदारों की सूची में शामिल निजी संपत्तियां सील की जा रही है, वहीं सरकारी संपत्तियों के प्रति ढील बरती जा रही है।
सरकारी विभागों के शहर में चल रहे भवनों पर संपत्ति कर के करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है, बावजूद इसके इनके खिलाफ कार्रवाई केवल विभागाध्यक्षों को डीओ लेटर लिखने तक सीमित है। इसे निवर्तमान पार्षद नगर निगम की दोहरी नीति करार दे रहे हैं। साथ ही मांग कर रहे हैं कि सभी बकायेदारों पर बिना पक्षपात एक जैसी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
शहर में दिव्य नगर व अन्य योजनाओं के प्रोजेक्ट व दूसरे विकास कार्यों सहित नगर निगम स्टाफ के वेतन, भत्तों व अन्य सेवाओं और कामों पर खर्चों के लिए धनराशि की जरूरत होती है। इसके लिए हर साल बजट में नगर निगम के विभिन्न स्रोत से आय का लक्ष्य रखा जाता है। इनमें नगर निगम की आय का सबसे बड़ा स्रोत संपत्ति कर है।
करीब 2600 निजी संपत्तियों पर संपत्ति कर के 94.10 करोड़ रुपये बकाया है। ऐसे ही दस सरकारी विभागों पर 15 करोड़ रुपये बकाया है। ये देख निगम अफसरों ने निजी संपत्ति मालिकों की अलग-अलग बकाया राशि मुताबिक सूचियां तैयार की और नवंबर के आखिरी व दिसंबर के शुरुआत में नोटिस जारी किए।
इसमें खाली प्लॉट, मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान व औद्योगिक इकाइयां सहित अन्य संस्थान शामिल रहे। इनमें गत सप्ताह में चार संपत्तियां सील भी की जा चुकी हैं, वहीं अन्य संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई की तैयारी है। लेकिन, बकायेदारों में शामिल सरकारी विभागों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई पुराने ढर्रे पर केवल विभागाध्यक्षों को डीओ लेटर लिखने तक सिमटी है।
इसी पर निवर्तमान पार्षद सवाल उठा रहे हैं। इनमें रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि कई सरकारी विभागों के शहर में चल रहे भवनों पर लाखों रुपये का संपत्ति कर बकाया है, बावजूद इसके इन विभागों के खिलाफ कार्रवाई वर्षों बाद भी पत्राचार तक सीमित है। दोहरी नीति अपनाकर छोटों पर सितम और बड़ों पर रहम किया जा रहा है। इसमें पक्षपात न कर सभी बकायेदारों पर एक जैसी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।
संपत्ति कर के बकायेदारों में शामिल सरकारी विभागों को समय समय पर डीओ लेटर लिखा गया। ऐसा ही कुछ समय पहले भी किया गया। कई विभागों से बकाया कर जमा भी कराया गया है। इस बारे में आगे जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसी मुताबिक कार्रवाई अमल में लाएंगे। - अजय वालिया, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।