हथनीकुंड बैराज पर पिछले साल इस तरह उमड़े थे विदेशी पक्षी
- फोटो : Yamuna Nagar
वायुमंडल में फैली जहरीली धुंध का असर इंसान के साथ ही प्रवासी पक्षियों पर भी पड़ा है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में कलेसर नेशनल पार्क और आसपास का क्षेत्र विदेशी प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो जाता है, लेकिन इस बार वायु प्रदूषण ने इनका रास्ता रोक दिया है।
हर साल यमुना क्षेत्र में आने वाले पक्षी अभी तक यहां पहुंचे ही नहीं हैं। हथिनीकुंड बैराज और दादुपुर हेड सूने पड़े हैं। जबकि हर साल यहां दो से तीन हजार विदेशी पक्षी पहुंचते हैं। वन्य प्राणी विशेषज्ञों का मानना है कि वातावरण अनुकूल नहीं पाने पर प्रवासी पक्षियों ने रास्ता बदल लिया है।
यमुनानगर में पहली बार एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 क्यूबिक प्रतिघन मीटर के पार पहुंचा है। जिसका असर वाइल्ड लाइफ पर पड़ा है। हालांकि वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों का कहना है कि पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है और 15 नवंबर तक कलेसर राष्ट्रीय उद्यान व आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से गुलजार हो जाएगा।
विदेशी पक्षियों के पसंदीदा स्थल
यमुनानगर के पहाड़, यमुना का किनारा और कलेसर का जंगल विदेशी पक्षियों को खूब भाता है। राष्ट्रीय उद्यान कलेसर, हथिनीकुंड बैराज, ताजेवाला हेड, दादूपुर हेड नहर घाट, पश्चिमी यमुना नहर बुडिया आदि इनके पसंदीदा जगह हैं।
लंबी दूरी तय कर ये पक्षी आते हैं
हर वर्ष साइबेरिया से लंबी उड़ान भर कर यहां कई दुर्लभ प्रजातियों के हजारों पक्षी आते हैं। इनमें पेंटेड स्टॉक, पिंटेल, साइबेरियन क्रेन व कूट्स जैसी दुर्लभ प्रजातियों के विदेशी पक्षी शामिल होते हैं। साइबेरियाई पक्षी बार हेडेड गूज भी यहां दिखाई देते हैं। इस पक्षी की खासियत यह होती है कि यह झुंड में रहकर वी शेप में उड़ान भरते हैं। मंगोलिया व हिमालियन क्षेत्र से प्रवासी पक्षी भी यमुना किनारे पहुंचते हैं।
पिछले सीजन में 2 से तीन हजार प्रवासी पक्षी पहुंचे थे
वाइल्ड लाइफ के मुताबिक, पिछले सीजन में 2 से तीन हजार प्रवासी पक्षी यहां पहुंचे थे। हालांकि इसका पुख्ता आंकड़ा नहीं है। इस बार इस संख्या में बढौतरी की उम्मीद की जा रही थी। इन प्रवासी पक्षियों को दूर-दूर से लोग देखने के लिए आते। हथिनी कुंड बैराज व साथ लगते नहरी क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों के लिए ठहराव का इंतजाम कराने बारे प्रपोजल भी बनाकर भेजा गया था। ताकि अधिक सुविधा मिलने पर प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ सकें।
रिसर्च की जरूरत
पक्षियों पर मौसम के दुष्प्रभाव के बारे में प्रसिद्ध जूलॉजिस्ट डॉ. राजेश कलसी का कहना है दो दशक पहले तक मेहमान पक्षियों का आगमन बड़े पैमाने पर होता था। इससे यमुना क्षेत्र के जलाशयों की रंगत बढ़ जाती थी। लेकिन बढ़ते प्रदूषण, जल स्त्रोतों में गिरावट और असुरक्षा की भावना के कारण पक्षियों की तादाद लगातार घटती जा रही है। प्रदूषण का हर उस जीव पर असर पड़ता है जो सांस लेता है। प्रदूषण का पक्षियों पर भी असर पड़ता है।
जिस तरह से प्रदूषण में इजाफा होता जा रहा है, उस हिसाब से पक्षियों पर इसके प्रभाव पर रिसर्च करने की बड़ी जरूरत है। आमतौर पर प्रवासी पक्षी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक पहुंच जाते हैं। पक्षियों की कम संख्या में पहुंचने की एक वजह प्रदूषण भी हो सकता है। हालांकि विभाग की तरफ से ऐसा कोई रिसर्च नहीं किया गया है। उम्मीद है कि अगले 15 दिन में काफी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंच जाएंगे।-राजेश चहल, निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग