कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी से विवाह के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। नवंबर और दिसंबर महीने में विवाह की कुल 14 तिथियां हैं, जो अत्यंत शुभ हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक माह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। चूंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निंद्रा के बाद एकादशी के दिन जागते हैं। इसलिए इसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं।
वहीं शास्त्रानुसार माता का दर्जा प्राप्त पौध तुलसी का विवाह भी इसी माह की एकादशी को होता है। जिसे तुलसी विवाह कहते हैं। यह वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी में से एक है। इस दिन महिलाएं व्रत कर तुलसी का कन्यादान कर भगवान विष्णु के सालिग्राम रूप से विवाह करवाती हैं। इसी दिन से विवाह का डूबा तारा भी उदय हो जाता है। इस बार विवाह के 14 बड़े मुहूर्त हैं। जो मनोरथ व मनोकामना व कार्य सिद्धि योग हैं।
इसलिए है इस एकादशी का महत्व
बूड़िया निवासी पंड़ित ललित शर्मा ने बताया कि भगवान विष्णु को जगत पालक कहा जाता है। उन्होंने बताया कि शंखासुर नाम का एक महाबलशाली असुर था। जिसके आतंक से पृथ्वी पर धर्म का नाश हो रहा था। जिस कारण भगवान विष्णु व दैत्य शंखासुर का भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को युद्ध हुआ।
यह युद्ध काफी लंबे समय तक चला। शंखासुर के वध के बाद भगवान विष्णु बहुत थक गए थे। जिस कारण वे क्षीर सागर स्थित अपने धाम पर सोने चले गए। चार माह के बाद कार्तिक मास की एकादशी को भगवान विष्णु उठे। जिस कारण इसे देवउठनी और देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस दौरान सभी देवी-देवताओं ने भगवान विष्णु की पूजा आराधना की।
इसी दिन होता है तुलसी विवाह
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस वर्ष देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को है। इस दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है। भगवान सालिग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह होता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें जालंधर को हराने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी परम भक्त वृंदा के साथ छल किया था और इसके बाद असुर राज जालंधर का वध कर दिया था। यह देखकर वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप देकर पत्थर का बना दिया था।
जालंधर माता लक्ष्मी का भाई था। जिस पर मां लक्ष्मी ने भाभी वृंदा से विनीत की। जिसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप मुक्त कर दिया था। वृंदा अपने पति जालंधर के साथ ही सति हो गई। वृंदा की देह राख से एक पौधा उत्पन्न हुआ। जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी का नाम दिया। वृद्धा के सातित्व को अमर करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सालिग्राम रूप से तुलसी का विवाह करवाया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
यह है विवाह के शुभ मुहूर्त
पंड़ित ललित ने बताया कि जिस दिन तुलसी का विवाह होता है वह दिन बहुत ही मंगलकारी होता है। इस दिन जिस जातक का विवाह होता है वह सुखद व हर्षोल्लास पूर्ण जीवन पाता है। उन्होंने बताया कि नवंबर दिसंबर में 14 तिथियां विवाह के लिए सर्वोत्तम हैं। नवंबर दिसंबर में विवाह की सभी तिथियां मार्गशीर्ष हैं।
विवाह के शुभ मुहूर्त और तारीखें
08 नवंबर एकादशी, देवउठनी
19 नवंबर कृष्णपक्ष सप्तमी
20 नवंबर कृष्णपक्ष अष्टमी
21 नवंबर कृष्णपक्ष नवमी
22 नवंबर कृष्णपक्ष दशमी
23 नवंबर कृष्णपक्ष एकादशी
28 नवंबर शुक्लपक्ष द्वितीया
30 नवंबर शुक्लपक्ष चतुथी
01 दिसंबर शुक्लपक्ष पंचमी
02 दिसंबर शुक्लपक्ष छठी
03 दिसंबर शुक्लपक्ष सप्तमी
07 दिसंबर शुक्लपक्ष एकादशी
11 दिसंबर शुक्लपक्ष चतुर्दशी
12 दिसंबर शुक्लपक्ष पूर्णिमा