संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाई जाएंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से विशेष कार्यक्रम करवाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग और चंडीगढ़ पीजीआई का अनुबंध हुआ है। इसके अंतर्गत पीजीआई के चिकित्सक विद्यार्थियों को जागरूक करेंगे।
इसके अलावा ऑनलाइन स्तर पर भी विद्यार्थियों को विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़कर जागरूक किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति गंभीर बनाना और स्वस्थ जीवन शैली की जानकारी देना है, ताकि इसे अपनाकर वे स्वस्थ रहें और परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करें। शिक्षा विभाग के इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को जानकारी भी मिलेगी।
इसके तहत चिकित्सक विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातें समझाएंगे। इसमें चिकित्सक विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधित सलाह भी देंगे। वहीं, शिक्षा निदेशालय की ओर से यह कार्यक्रम अनिवार्य रूप में लागू नहीं किया गया है, बल्कि इसे जागरूकता अभियान के रूप में चलाया जाना है। इससे विद्यार्थियों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि अतिरिक्त कार्य होने के कारण विद्यार्थी सरलता और सहजता से इसमें भागीदारी निभाएंगे।
इस जागरूकता कार्यक्रम से विद्यार्थी दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली अच्छी आदतों के बारे में जानेंगे। चिकित्सक विद्यार्थियों को संतुलित आहार लेने, स्वच्छ पानी पीने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त नींद लेने, हाथों की सफाई रखने और मानसिक तनाव से बचने इत्यादि विषयों पर जानकारी देंगे। उन्हें मौसमी व सामान्य बीमारियों की भी जानकारी के साथ इससे बचाव और फौरी उपचार के बारे में भी बताया जाएगा।
परिवार को जागरूक करेंगे विद्यार्थी
विद्यालय में मिलने वाली जानकारी विद्यार्थी परिवार में भी साझा करेंगे। इससे माता-पिता सहित घर के बुजुर्ग, भाई-बहन व अन्य पारिवारिक सदस्यों को भी जागरूक करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ उनके परिवार व आसपास के वातावरण भी स्वस्थ्य बनाना है। इससे उनके परिवार के सदस्य भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह एक विद्यार्थी अपने पूरे परिवार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
सकारात्मक बदलाव होंगे : प्रेमलता
जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता बक्शी ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है। वहीं, इससे अध्यापक भी जागरूक होंगे। इसके सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि किताब से ज्यादा बच्चे व्यवहारिक जानकारी जल्दी अपनाते हैं। जब विद्यार्थी स्वयं समझकर अच्छी अभी से अपनाएंगे तो यह जीवन भर साथ रहेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विद्यार्थियों की जीवनशैली में बदलाव हुआ है। खान-पान के साथ बढ़ता स्क्रीन समय, गलत आदतें, शारीरिक गतिविधियों की कमी से उनके स्वास्थ्य व स्वभाव में काफी अंतर आया है। इस जागरूकता कार्यक्रम से उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य में सुधार होगा।