एचएसजीपीसी किसी भी गुरुद्वारे में गुल्लक या माया के लिए नहीं गई। हम केवल सेवा के लिए आए हैं। जो भी चढ़ावा गुरुद्वारों में आता था उसमें से 35 प्रतिशत तो एसजीपीसी वाले ले जाते थे। अब सिर्फ वही विरोध कर रहे हैं जिनके हाथों से हमने चाबियां ली हैं। कानूनी तौर पर एचएसजीपीसी को मान्यता मिली है। अभी इसकी रूपरेखा बनाने में थोड़ा समय लगेगा। यह बात एचएसजीपीसी के प्रधान महंत कर्मजीत सिंह ने शुक्रवार को जीएनजी कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। इससे पहले उन्होंने डेरा संत निश्चल सिंह थड़ा साहिब जोड़ियां में चार मार्च से शुरू हो रहे होला मोहल्ला समागम की तैयारियों को लेकर बैठक की थी।
पुलिस बल के साथ गुरुद्वारों की सेवा संभालने के सवाल पर महंत कर्मजीत सिंह ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना पुलिस का काम है। एसजीपीसी कोई विरोध न करे इसलिए पुलिस ने गुरुद्वारों के बाहर सुरक्षा मुहैया कराई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एचएसजीपीसी के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। सरकार को कोर्ट में जवाब देना है। एचएसजीपीसी एडहॉक के सदस्य जिस भी गुरुद्वारा साहिब में गए लोगों ने उम्मीद से बढ़कर सिरोपा पहना कर सभी का स्वागत किया। कुरुक्षेत्र समेत किसी भी जिले में लोगों ने विरोध नहीं किया। पंजाब से बुलाकर कुछ लोगों को बॉर्डर पर नारेबाजी करवाई गई। अपने साथी को छुड़ाने के लिए लिए पंजाब में अमृतपाल सिंह द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को थाने में लेकर जाने के सवाल का जवाब देने से महंत कर्मजीत सिंह पहले बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जब से वह प्रधान बने हैं व्यस्त होने के कारण न तो उन्होंने टीवी देखा है और न ही अखबार पढ़ा है। बाद में उन्होंने कहा कि यदि कोई मर्यादा में रह कर गुरु ग्रंथ साहिब की इज्जत करेगा तो ठीक है, यदि मर्यादा में रह कर इज्जत नहीं करेगा तो उसे कोई भी ठीक नहीं कहेगा।