संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। करवाचौथ का व्रत भोर से चंद्रोदय तक किया जाता है। इस दौरान तड़के महिलाएं सरगी करती हैं और रात को चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर व्रत पारण किया जाता है। अमादपुर के प्राचीन सूर्यकुंड मंदिर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि शुक्रवार को करवाचौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान पूजन समय शाम पांच बजकर 57 मिनट से सात बजकर 11 तक रहेगा। यह लाभ-उन्नति मुहूर्त हैं और इसमें पूजा करने से दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी और पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा। परिवार में सु्ख-समृद्धि, यश, कीर्ति आएगी और संतान धन की प्राप्ति होगी। वहीं, व्रत पारण का समय रात नौ बजकर दो मिनट से दस बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
चंद्र दर्शन के बाद करें पूजन
आचार्य त्रिलोक महाराज ने कहा कि इस दिन चंद्रमा का बेसब्री से इंतजार रहता है। करवाचौथ चंद्रोदय का समय आठ बजकर 13 मिनट पर रहेगा। उन्होंने बताया कि चंद्र दर्शन के लिए महिलाएं जल, दूध, चावल, चीनी मिलावर लौटे में तैयार करें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें। पति द्वारा जल ग्रहण कर व्रत पारण करें। पारण के बाद पानी पीएं और फिर मिठाई या फल खाएं। उन्होंने कहा कि इस दिन सात्विक भोजन किया जाता है।