कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के संचालकों को निर्देश देते विशेष अधिकारी अनिल यादव। प्रवक्ता
यमुनानगर। शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने को लेकर नगर निगम कार्यालय में बुधवार को बीडब्ल्यूजी (बल्क वेस्ट जनरेटर) कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न होटल, मैरिज पैलेस, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में विशेष सफाई अधिकारी अनिल यादव एचसीएस, सीएसआई अनिल नैन, स्वच्छ भारत मिशन सलाहकार लोकेश सेन ने प्रतिभागियों को कचरा सेग्रीगेशन, ऑन साइट कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विशेष सफाई अधिकारी अनिल यादव ने सभी होटल, मैरिज पैलेस प्रतिनिधियों को सचेत किया कि नगर निगम की टीम जल्द ही सभी संस्थानों में जांच करेंगी। जो भी संस्थान सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करता हुआ मिला उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और निगम की ओर से बड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने सभी को एमएसडब्ल्यू मैनेजमेंट अधिनियम 2016 और बीडब्ल्यूजी गाइडलाइन 2017 के अनुसार संस्थान से निकलने वाले कचरे का स्वयं निपटान करने के निर्देश दिए। कार्यशाला के दौरान गीले व सूखे कचरे को अलग रखने, होटल, मैरिज पैलेस और अन्य संस्थानों के परिसर में ही कंपोस्ट तैयार कर गीले कचरे से खाद तैयार करने और रीसाइक्लेबल कचरे को अधिकृत रीसाइक्लर तक पहुंचाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेष अधिकारी (सफाई) अनिल कुमार यादव (एचसीएस) ने सभी को अपने संस्थान से निकलने वाले कचरे का निपटान करने, गीले कचरे से कंपोस्ट पिट के माध्यम से खाद तैयार करने और सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करके क्रॉकरी का प्रयोग करने की हिदायत दी। उन्होंने सभी को पॉलिथीन के नुकसान बताए। उन्होंने कहा कि कैल कचरा निस्तारण प्लांट में 90 प्रतिशत कचरा सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पॉलीथिन का है। जिसके जिम्मेदार हम सब हैं। अब जिसके भी होटल, ढाबा, मैरिज पैलेस, रेस्टोरेंट आदि में सिंगल यूज प्लास्टिक मिली तो उसका चालान होगा।
अनिल यादव ने कहा कि शहर को साफ, स्वच्छ, सुंदर और स्वच्छता रैंकिंग में अव्वल स्थान पर लाने के लिए हर शहरवासियों की भागीदारी जरूरी है। इसलिए सभी होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट व मैरिज पैलेस संचालक भी इसमें अपना सहयोग दें। हमारी लड़ाई गंदगी, अव्यवस्था, कचरे व इनसे होने वाली बीमारियों से है। सीएसआई अनिल नैन ने कहा कि 50 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) की श्रेणी में आते हैं। ऐसे सभी संस्थानों के संचालक संस्थान से निकलने वाले कचरे का स्वयं निपटान सुनिश्चित करें।
कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के संचालकों को निर्देश देते विशेष अधिकारी अनिल यादव। प्रवक्ता