पहले गणेश विसर्जन, फिर दुर्गा विसर्जन, उसके बाद सांझी तथा खेत्री विसर्जन। विर्सजनों के साथ-साथ शहर की गंदगी से मैली हो रही यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए श्री परमेश्वरी महामाया मंदिर की ओर से इस बार अहम और प्रशंसनीय प्रयास किया गया है।
यमुना मैली न हो इसके लिए मंदिर सभा की ओर से इस बार खेत्री का विसर्जन यमुना नहर में नहीं किया गया, बल्कि खेत्री को दड़वा स्थित गोशाला में गायों को खिलाया गया।
शहर के प्रमुख मंदिरों में शुमार श्री परमेश्वरी महामाया मंदिर (जंगला वाली माता मंदिर) को कुछ श्रद्धालुओं ने सुझाव दिया था कि हर साल यमुना नदी और नहर में श्रद्धालु मूर्तियों और पूजा सामग्री का विसर्जन करते हैं। लोग विसर्जन के साथ-साथ नहर में खाद्य पदार्थ, पुष्प आदि भी डाल देते हैं।
इससे यमुना में प्रदूषण फैलता है। इस विचार-विमर्श कर फैसला लिया कि इस बार मंदिर की ओर से यमुना में खेत्री विसर्जन नहीं किया जाएगा। खेत्री पूजन पर मंदिर में शहर के विभिन्न स्थानों से आई सैकड़ों खेत्रियों का पूजन किया गया।
इसके बाद ख्ेात्री के ऊपरी हिस्से की कटिंग करके उसे चारे के रूप में दड़वा स्थित गोशाला में गायों को खिलाया गया। वहीं बाकी के हिस्से को गोशाला में ही एक स्थान पर जमीन के नीचे दबा दिया गया।
खेत्री पूजन के लिए शहर की विभिन्न कॉलोनियों से महिलाएं और पुरुष खेत्री लेकर आए। खेत्री की कटिंग से पूर्व मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन किया गया और खेत्रियों की आरती उतारी गई।
यमुना सेवा समिति कनालसी के प्रधान किरण पाल राणा व महासचिव अनिल शर्मा ने कहा कि यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। अगर सभी शहरवासी और जिलावासी यमुना में गंदगी न डालने का प्रण ले तो नदी को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है।