जठलाना। इस बार आम के पेड़ों पर भरपूर बोर (फूल) आया है। ऐसे में बंपर फसल की उम्मीद जताई जा रही है लेकिन आम की फसल पर तेला-चेपा रोग का प्रकोप होने से बागवानों की नींद उड़ गई है। बागवान इस रोग का खात्मा करने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं, बावजूद इसके रोग खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में बागवानों की चिंता बढ़ गई है। अगर मोनोक्रोटोफॉस दवाई का पानी में मिलाकर आम के पेड़ पर छिड़काव करें तो रोग खत्म हो जाएगा। कीटनाशक के छिड़काव के चलते जहां बागवानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है वहीं आम भी स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक होगा।
जिले के जठलाना क्षेत्र की बात करें तो यहां पांच से सात बाग हैं, लेकिन तेला-चेपा रोग ने आम के बोर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। बीमारी इतनी तेजी से फैल रही है कि 70 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। जठलाना में ठेके पर बाग़ लेकर खेती करने वाले बागवान दिलशाद ने बताया कि इस बार आम की फसल पर बोर अच्छा आया था। जिससे उन्हें अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन अब तेला-चेपा नामक रोग से फसल खराब हो रही है। अगर यही स्थिति बनी रही तो केवल 20 से 25 प्रतिशत तक ही आम की फसल बच पाएगी। जठलाना के ही बागवान रतिया व जमील ने बताया कि तेला-चेपा रोग का प्रकोप ज्यादा है, कीट आम का रस चूसकर फसल को खराब करने के साथ ही गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रहा है।
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लगभग पांच हजार हेक्टेयर में खड़ी है आम की फसल
जिले में लगभग पांच हजार हेक्टेयर में आम की फसल खड़ी है। ज्यादातर फसल उच्च एरिया जैसे छछरौली, प्रतापनगर, बिलासपुर व साढौरा क्षेत्र में आम की फसल की खेती की जा रही है। रादौर एरिया में कुछ ही आम के बाग हैं। यहां से काफी मात्रा में आम दूसरे जिलों में भी भेजा जाता है। ज्यादातर आम अचार के लिए प्रयोग होता है।
वर्जन
तेला-चेपा रोग काफी खतरनाक होता है। जो आम के बोर को खत्म कर देता है और फल को काला कर देता है। बागवानों को आम की फसल को बचाने के लिए कौन सी दवाई का प्रयोग करना चाहिए इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। बकायदा कार्यालय की टीमें एरिया में जाकर जायजा ले रही हैं।
-कृष्ण कुमार, डीएचओ, बागवानी विभाग।