पानीपत। कथावाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि प्रेम स्वतः है, स्वाभाविक है। इसे कोशिश करके नहीं किया जा सकता। कई लोग कहते हैं हम साठ के बाद भक्ति ही करेंगे। ऐसा नहीं होता। ये तो बहुत लोगों को नहीं पता उस उम्र में क्या हो जाए। ऐसे में लोगों को अभी भक्ति करनी चाहिए।
उन्होंने ये बात सेक्टर 13-17 में वृंदा एनक्लेव के पार्क-3 में वृंदा एनक्लेव परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सत्संग समारोह के चौथे दिन वीरवार काे कही। पूर्व सांसद संजय भाटिया मुख्यातिथि रहे। उनको वृंदा एनक्लेव परिवार ने कथा सत्संग समारोह में पटका ओढ़ाकर सम्मानित किया। राधे-राधे महाराज ने बताया कि मीरा को मैया ने बस इतना सा ही कहा था कि देख सामने मूर्ति में जो बैठे हैं गोपालजी, वहीं तेरे पति हैं। उन्होंने उनको अपना सबकुछ मान लिया था। उन्होंने कहा कि भक्ति में भाव होते हैं। ये कहां और किसको देखकर आ जाएं पता नहीं। कोई योजना बनाकर ये नहीं होता। धीरे-धीरे हम जगत छोड़ रहे हैं। धीरे-धीरे अब हम भगवान से प्रेम करने का प्रयास कर रहे हैं। धर्माचरण की बात है कि धर्म के आचरण का अभ्यास होना चाहिए। हम धीरे-धीरे अच्छे-अच्छे संग करें, सत्संग का प्रयास हो। सत्संग भी धर्माचरण के अंतर्गत ही आता है। धर्माचरण का अभ्यास व्यक्ति सदा करें।
कृष्ण जन्मोत्सव पर पंडाल को फूलों से सजाया गया। माखन मिश्री का भोग लगाया और फूलों की पुष्प वर्षा कर मंगल गीत गाए गए। श्रद्धालुओं ने नंद महोत्सव के उपलक्ष्य में हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की..., आयो रे आयो मेरा श्याम प्यारा आयो भजन पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया।
वृंदा एन्कलेव में कथा करते राधे-राधे महाराज। संस्था- फोटो : विश्वविद्यालय