संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर नगर निगम के चुनावी रंगा नजर आ रहा है। कॉलोनियों व मोहल्लों में राजनीतिक दलों व आजाद मेयर व पार्षद प्रत्याशियों के दफ्तर खुल गए हैं। इनमें किसे वोट दें, इसे लेकर मतदाताओं के बीच भी चर्चाएं होने लगी हैं। इन्हीं चर्चाओं के शहर के बड़े मुद्दे भी लोगों की जुबान पर आ रहे हैं। इसमें एक मुद्दा स्ट्रीट लाइट का है।
पिछले सदन के कार्यकाल में शुरू से अंत तक कई वार्डों में नए एलईडी लाइटों का इंतजार रहा, वहीं अन्य सोडियम व ट्यूब व सीएफएल लाइट खराब होते रहे। कार्यकाल के बीच आठ वार्डों में मार्च-2020 से सितंबर-2021 में 8164 एलईडी लाइट लगे, पर उनमें भी कई बंद पड़े, वहीं अन्य 14 वार्डों में कार्यकाल खत्म होने के बाद एलईडी लाइट लगने लगे।
आरोप है कि नए एलईडी लाइट लगाने का काम भी कछुआ चाल है, जिससे वार्डों की कई गलियों-सड़कों में शाम बाद अंधेरा पसरा रहता है। अब निगम चुनाव के माहौल में शहरवासी भावी शहर की सरकार (मेयर व 22 वार्ड पार्षदों) से उम्मीद लगा रहे हैं कि स्ट्रीट लाइट की दिक्कत दूर होगी।
मार्च-2020 में नगर निगम ने वार्ड-2, 6, 8, 9, 10, 15, 19 व 21 में सोडियम लाइट-बल्ब, सीएफएल व ट्यूब लाइट के स्थान पर एलईडी लाइट लगाने का करीब चार करोड़ रुपये का टेंडर हुआ था। इसके तहत काम शुरू होते ही गुणवत्ता व अन्य बिंदुओं पर उठे सवालों और आरोपों के चलते काफी समय तक आठ वार्डों में ही यह प्रोजेक्ट लटका रहा। निगम अफसरों से लेकर विधानसभा पिटीशन कमेटी में भी मामला पहुंचा।
इसके बाद सितंबर-2021 में जाकर उक्त आठ वार्डों में 8164 एलईडी लाइट लगाई गईं। अन्य 14 वार्ड एलईडी लाइट प्रोजेक्ट से अछूते रह गए। इन 14 वार्डों में पुराने सोडियम, ट्यूब, सीएफएल लाइट खराब होते रहे, जिससे वार्डों की गलियों-सड़कों में अंधेरा रहा। इस पर निवर्तमान पार्षद सदन बैठकों में नए लाइट न लगने और पुराने बार-बार खराब होने का मुद्दा उठाते रहे।
आरोप ये भी लगे कि पुराने लाइट शिकायत करने पर भी ठीक नहीं हो रहे। वार्ड तीन से निवर्तमान पार्षद ने तो बिगड़ी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर सदन बैठक में मोमबत्ती दिखाकर भी विरोध किया था। बावजूद इसके सदन के कार्यकाल में 14 वार्डों में से अधिकांश वार्डों में नए एलईडी का इंतजार होता रहा।
कार्यकाल खत्म होने पर लगने लगी लाइटें
कार्यकाल खत्म होने के बाद शहर के लिए मंजूर 41 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइट लगने लगे। ये लाइट नगर पुराने सोडियम बल्ब, सीएफएल व ट्यूब लाइट के जगह लगने हैं। इन 13 हजार पुराने प्वाइंट्स के अलावा 28 हजार नए प्वाइंट पर भी यह लाइट लगेंगे। लेकिन निवर्तमान पार्षद देवेंद्र सिंह, विनय कांबोज, रामआसरा भारद्वाज, निर्मल चौहान ने कहा कि नए एलईडी लाइट लगाने का काम अभी भी कछुआ चाल हो रहा है, जिससे उनके वार्डों में कई गलियों-सड़कों पर अभी भी शाम बाद अंधेरा है, जिस बीच सड़क दुर्घटना व आपराधिक घटना की आशंका रहती है। इसलिए सभी वार्डों में नए लाइट लगाने का काम शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
अंधेरे में हुईं तीन स्नेचिंग
शिवाजी पार्क निवासी अकाउंटेंट प्रदीप कोहली ने बताया कि डीएवी स्कूल के बैक गेट वाली में दूर तक कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है। इससे शाम बाद अंधेरा रहता है। इसके चलते आसपास के घरों के लोगों को गली में निकलने से भी डर लगता है, क्योंकि तीन स्नेचिंग की घटनाएं भी हो चुकी है। स्ट्रीट लाइट मूल जरूरतों में से एक है, इसलिए इसे ठीक कराया जाना जरूरी है।
मिले स्ट्रीट लाइट की सुविधा
लेबर कॉलोनी निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेन सपरा ने कहा कि शहर के लोग संपत्ति कर सहित अन्य शुल्क व कर अदा करते हैं, इसलिए उन्हें स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधा मिलनी चाहिए। लेकिन गठन के 15 वर्ष बाद भी नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं है। जहां है, वहां भी बार-बार बंद होने की समस्या है।
स्टेडियम के पास अंधेरा
तेजली कॉलोनी के मुकेश कुमार ने बताया कि तेजली खेल परिसर के सामने जहां लोगों को सौ-सौ गज के प्लॉट अलॉट किए गए थे, वहां और आसपास स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम होते ही दूर तक अंधेरा रहता है, जिससे निवासियों को आने-जाने में आपराधिक घटना होने का भय रहता है। साथ ही यहां बने कीचड़ के हालात में गिरने की आशंका रहती है।
सभी जगह लगें लाइटें
सेक्टर-17 के केवल कृष्ण सैनी ने बताया कि कई जगह एलईडी लाइट लगे, पर उनमें कई बंद या खराब है। कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट पर्याप्त संख्या में नहीं लगे। दूर दूर तक लाइट न होने से अंधेरा रहता है। लाइट न होने से शाम बाद अंधेरे में सड़कों पर बने गड्ढे भी नहीं दिखते, कई बार लोग चोटिल हो चुके हैं। मांग के मुताबिक स्ट्रीट लाइट लगनीं चाहिए।
एलईडी लाइट लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास है। इस संबंध में संबंधित अफसरों को पहले ही दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।