संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम ने 47 लाख रुपये खर्च कर शहर के पांच चौक पर ट्रैफिक कंट्रोल लाइटें लगवाई हैं। इन चौक पर लाइटें तो लग गई, लेकिन यह आईआरसी (इंडियन रोड कांग्रेस) के मानकों पर खरा नहीं उतरते। वहीं शहर का एक भी चौक ऐसा नहीं है जो आईआरसी के मानकों अनुसार बना हो। कहीं सड़कें टूटी पड़ी हैं तो कहीं सीवरेज के मेनहोल खुले हैं। यहां तक की डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त हैं। सड़क और बरम के बीच में काफी अंतर है।
शहर के भाई कन्हैया साहिब चौक पर नई ट्रैफिक लाइट लगी है। मधु होटल की तरफ से आने वाले वाहन चालक जब कन्हैया चौक से महाराणा प्रताप चौक की तरफ मुड़ते हैं तो यहां पर सड़क कच्ची है। बजरी बिखरी पड़ी है। लोगों को मुड़ने के लिए दूर से चक्कर लगाना पड़ता है। ट्रैफिक लाइट के पोल के पास कीचड़ भी है। इसी तरह गांधी नगर थाना चौक पर सड़क बरम से ऊंची है। यहां लगी ट्रैफिक लाइट का सिग्नल भी गलत है।
लाइट थाने व मॉडल बस स्टैंड की तरफ जाने के लिए ग्रीन सिग्नल ही नहीं दिखाती। उल्टा सरोजिनी कॉलोनी जाने के लिए ग्रीन सिग्नल है। इस तरफ कोई सड़क ही नहीं है। महाराजा अग्रसेन चौक जगाधरी पर छछरौली की तरफ से आने वाले वाहन जब पुराना सहारनपुर रोड की तरफ मुड़ते हैं तो वह सीवरेज के होल में गिरने से बाल-बाल बचते हैं। यह चौक नेशनल हाईवे का है। चौक पर हर समय बजरी बिखरी रहती है।
लोगों का कहना है कि सभी चौक पर तैनात यातायात पुलिस व होमगार्ड के जवान हाथों में मोबाइल लेकर नियम तोड़ने वालों की फोटो खींच कर चालान काटने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन कभी चौक की खामियों को दूर करने के लिए नगर निगम, एनएच या अन्य अधिकारियों को पत्र तक नहीं लिखते। जो चौक खुद नियमों पर खरे नहीं उतर रहे उन्हीं पर यातायात नियम तोड़ने के चालान काटे जा रहे हैं।
सड़कों की हालत सही न होने का खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है जो लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं। 2024 में जिले में जो सड़क हादसे हुए थे उनमें 227 लोगों की जान गई थी। जबकि 216 गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं 124 को कम चोट लगी थी।
जिले में टूटी सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है। यदि किसी चौक पर भी काम कराने की जरूरत है तो उसे भी दुरुस्त करवा दिया जाएगा। - पुनीत मित्तल, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।