यमुनानगर। जिले में बढ़ते अपराध और पुलिसकर्मियों पर उठते सवाल के बीच एकबार फिर खाकी पर भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं। चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ साढौरा थाने में केस दर्ज होने के बाद लोगों में चरचा है कि जब सुरक्षा और कानून की जिम्मेदारी संभालने वाले ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएंगे तो अपराध को कैसे रोका जा सकेगा।
एनडीपीएस के झूठे केस में फंसाकर लोगों से वसूली करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों पर साढौरा थाने में केस दर्ज होने के बाद बढ़ते अपराध और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। साढौरा थाने में खाकी पर लगे दाग का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि दो माह पहले ही आठ मार्च को विजिलेंस ने बुड़िया थाना के एएसआई अनिल कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में पति-पत्नी में हुए झगड़े के बाद सहमति बनने पर भी एएसआई पति को तंग कर रहा था। आरोप है कि समझौता मंजूर करने के लिए आरोपी पुलिसकर्मी ने 21 हजार रुपये की डिमांड की थी और मौके पर 10 हजार रुपये भी वसूले थे। इसके बाद जब पीड़ित ने समझौते की कॉपी मांगी तो आरोपी पुलिसकर्मी ने बकाया रकम देने का दबाव बनाया, जिसके बाद शिकायत पर विजिलेंस ने आरोपी एएसआई को गिरफ्तार किया था। यही नहीं हाल ही में हुए जानू हत्याकांड के मामले में भी परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। आरोप था कि अगर समय पर पुलिस सक्रिय होती तो जानू की हत्या नहीं होती।