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Yamuna Nagar News: कपालमोचन मेला ः पड़ोसी राज्यों ने आने लगे श्रद्धालु

Tue, 28 Oct 2025 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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श्री ऋणमोचन सरोवर में भरा गया पानी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। तीर्थराज श्री कपालमोचन मेला एक नवंबर से शुरू होगा और पांच नवंबर तक चलेगा। मेले की शुरू होने में चार दिन शेष रह गए हैं। परंतु श्रद्धालुओं का आना अभी से शुरू हो गया है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए टैंट तथा मेले के दौरान लगने वाले झूले भी शुरू हो चुके। उधर, आने वाले श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर तीनों सरोवरों पर आस्था के दीप जला रहे हैं।
गऊ बछा मंदिर के पुजारी सुभाष शर्मा ने बताया कि बीते कुछ दिनों से श्रद्धालु लगातार यहां पहुंच रहे हैं। आज भी हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। उन्होंने कहा कि इस बार मेले के इंतजाम पहले से बेहतर हैं और करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है।
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उपमंडल अधिकारी बिलासपुर एवं मेला प्रशासक जसपाल सिंह गिल ने बताया कि श्री कपाल मोचन मेले में देशभर से श्रद्धालु तीनों पवित्र सरोवरों श्री कपालमोचन सरोवर, श्री ऋण मोचन सरोवर और श्री सूरजकुंड सरोवर में क्रमवार स्नान करने के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि मेले में श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रशासन पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। मेला प्रशासक के अनुसार मेले में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, दवाओं की उपलब्धता, अस्थायी शौचालय, बिजली, खाद्य सामग्री, दूध आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत, बैरिकेडिंग और पुलिस प्रबंधन जैसी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
जिला मुख्यालय से 23 किमी दूर मेला
जिला मुख्यालय से करीब 23 किमी. दूर कपालमोचन
कपालमोचन सरोवरों का तीर्थ है। जहां पर दूर दराज से हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। यह हिंदुओं और सिखों के लिए तीर्थ यात्रा का एक प्राचीन स्थान है। इसलिए, कहा जाता है सारे तीर्थ बार-बार, कपालमोचन एक बार। जहां पर केवल एक बार आने मात्र से लोगों के कष्ट पाप दूर हो जाते हैं। यहां भगवान राम, श्रीकृष्ण पांडव युद्ध के बाद एक बार ही आए। पुराणों में मान्यता है कि उनके पाप भी यहां के ऋणमोचन में स्नान करने से एक ही बार में धूल गए थे।
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इस तरह से दोनों बछड़े हो गए थे सफेद
एक कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम जी रावण को मारने के बाद ब्रह्म हत्या दूर करने के लिए परिवार सहित आए। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण व पांडव यहीं आए। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का वध किया था। इसी कारण पांडवों ने यही पर स्नान कर ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पाई। ब्राह्मण की हत्या करने के कारण बछड़े व उसकी माता को ब्रह्म हत्या का घोर पाप लगा जिससे बछड़े व गाय का रंग काला पड़ गया। गाय और बछड़े ने इसी सरोवर में स्नान किया और वह इस पाप से मुक्त हो गये। दोबारा दोनों का रंग सफेद हो गया था। मेले के अलावा अन्य दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं।

श्री ऋणमोचन सरोवर में भरा गया पानी। संवाद

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