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Yamuna Nagar News: अच्छी कमाई के फेर में जमापूंजी गंवाई... अब हो रहा है पछतावा

Tue, 28 Oct 2025 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर/व्यासपुर। अच्छी कमाई के फेर में जमा पूंजी गंवाई। यही नहीं कोई जमीन बेच बैठा तो किसी ने लाखों रुपये का कर्ज चढ़ा लिया। इसके बाद भी अरमान अधूरे ही रह गए, जिसे सोच कर बार-बार पछतावा हो रहा है। ये दास्ता हैं जिले के चार परिवारों की, जिनके यहां से चार युवा अमेरिका में नौकरी की उम्मीद में निकले थे, पर एजेंटों द्वारा डंकी रूट से भेजे जाने के चलते चारों को अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया।
चारों युवा रविवार को भारत पहुंचे, जिन्हें पुलिस ने परिजनों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया। उल्लेखनीय है कि पहले भी जिले के छह युवकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया जा चुका है। इनमें भेड़थल, पंजेटो, मिल्क झबालियां, खारवन के युवा शामिल थे। सभी डंकी रूट से अमेरिका में गए थे।
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नौ माह बाद बात कर परिवार को मिली राहत
गांव अलीपुरा से 23 वर्षीय हर्ष एक वर्ष पहले अमेरिका गया था। उसके चाचा रणधीर सिंह ने बताया कि उनके भाई का छह वर्ष पहले देहांत हो गया था। एक भतीजा इटली में है। हर्ष भी विदेश जाना चाह रहा था तो एजेंट से बात की। एजेंट ने अमेरिका भेजने का वादा किया, पर इसके लिए लाखों रुपये मांगे।
तब एक किल्ला जमीन 45 लाख रुपये में बेची और एजेंट ने रकम दी। लेकिन एजेंट ने हर्ष को डंकी रूट से अमेरिका भेजा। इसके लिए उसे अलग-अलग देशों से होकर मैक्सिको तक पहुंचाया गया। जहां उसे दीवार फांदकर अमेरिका भेजा गया, पर वहां अमेरिकी पुलिस ने पकड़ लिया। नौ माह से अमेरिका के कैंप में रहने के दौरान हर्ष से किसी तरह का संपर्क नहीं हो पाया। अब डिपोर्ट होकर हर्ष के आने पर उससे बात हो पाई, जिस पर परिवार को राहत मिली।
भूले नहीं भूलेंगी दिक्कतें

गांव अंटावा निवासी 26 वर्षीय सूर्य प्रताप के पिता राकेश कुमार खेतीबाड़ी करते हैं। परिवार के अनुसार सूर्य विदेश जाना चाहता था, जिसके लिए मोहाली के एजेंट से बात की गई थी। एजेंट ने 30 लाख रुपये मांगे थे। एजेंट को 30 लाख रुपये देने पर उसने डंकी रूट से मैक्सिको तक भेज दिया। उसे अलग-अलग देशों व जंगलों के रास्ते निकला गया। बीच रास्ते में भूखा-प्यासा भी रखा। मैक्सिको पहुंचने पर आगे नहीं भेजा, तब एजेंट को फोन किया, पर उसने फोन उठाना बंद कर दिया। जगाधरी के एजेंट से उसके परिवार के लोगों ने बात की तो उसने भी 30 लाख रुपये ले लिए। बाद में तस्करों ने मैक्सिको से दीवार फंदवाकर अमेरिका भेजा, पर वहां पुलिस ने पकड़ लिया। ढाई माह वह कैंप में था, जहां खूब परेशानियां हुई, जो जीवन भर कभी भूले नहीं भूलेंगी।
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परेशानियों को सोचकर सिहर जाते हैं बच्चे

गांव अजीजपुर निवासी 23 वर्षीय अभिषेक के चाचा दिनेश शर्मा ने बताया कि गांव से 24 वर्षीय सागर व भतीजे अभिषेक को अमेरिका जाना था। इसके लिए एजेंट से बात की। उसने दोनों का 44-44 लाख रुपये खर्च बताया। नवंबर-2023 में एजेंट ने सागर व अभिषेक को मुंबई बुलाया और अमेरिका भेजने के नाम पर प्रक्रिया की। इसके बाद दोनों को 24 जनवरी 2024 को मुंबई से दुबई भेजा गया, वहां से दोनों छह अप्रैल को वापस भारत आ गए। इसके बाद दिल्ली फिंगरप्रिंट के लिए बुलाया। दो माह तक हर सप्ताह अलग-अलग काम के बहाने एजेंट ने दोनों को बुलाया। 17 जुलाई को मुंबई से दोनों को गयाना भेज दिया। यहां से टैक्सी से ब्राजील, बुलीविया, पेरू, इक्वाडोर से कोलंबिया पहुंचाया। छह दिन तक पनामा के जंगल में दोनों को पैदल चलना पड़ा। पनामा में तस्करों ने रोक लिया, जहां गोलियां भी चली। किसी तरह पानी में छिपकर दोनों ने जान बचाई, वहां से उन्होंने कॉल किया। तस्करों ने आगे जाने के लिए 20-20 लाख रुपये मांगे। यह रुपये एजेंट को दिए। इसके बाद अलग-अलग जगह होकर दोनों मैक्सिको पहुंचे। मैक्सिको में पहुंचकर तस्करों ने उन्हें बैठा लिया फिर से पांच-पांच लाख रुपये मांगे। 26 दिसंबर 2024 मैक्सिको से दीवार फंदवाई, पर वहां दोनों को अमेरिकी पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद मिसी सिपी कैंप में रखा, जहां से एक-एक सप्ताह तक बाहर नहीं आने दिया गया। एक समय ही खाना दिया गया। ऐसी कई परेशानियां रहीं, जिन्हें सोचते ही बच्चे याद कर सिहर जाते हैं। फिलहाल परिवार को दोनों के सकुशल घर लौटने की खुशी है।
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