रादौर। घेसपुुर चुंगी के रोशनलाल देसी गोरक्षा केंद्र पर गोपाष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मुख्य वक्ता दंडी स्वामी महेशाश्रम महाराज ने श्रीमद्भागवत गीता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया था, तो उसमें कामधेनु गाय निकली थी। जिसे ऋषियों ने अपने पास रख लिया था, क्योंकि वे पवित्र थी। उसके बाद से ही अन्य गायों की उत्पत्ति हुई।
उन्होंने कहा कि महाभारत में बताया गया है कि गाय के गोबर और मूत्र में देवी लक्ष्मी का निवास होता है इसलिए ही दोनों ही चीजों का उपयोग शुभ काम में किया जाता है। हिंदू धर्म में गाय को पवित्र स्थान प्राप्त है। गाय में कई देवी-देवताओं का वास होता है और इसलिए गाय को पूजनीय स्थान प्राप्त है। गोपाष्टमी का ये पर्व गोधन से जुड़ा है।
उन्होंने बताया कि गोपाष्टमी के दिन सुबह उठने के बाद गायों को स्नान कराएं। गंध-पुष्प आदि से गायों की पूजा करने के बाद ग्वालों को उपहार आदि देकर उनका सम्मान करना चाहिए। इसदिन गायों को सजाया जाता है। साथ ही, भोजन कराएं और उनकी परिक्रमा करें। इस दिन थोड़ी दूर तक गायों के साथ चलना चाहिए। शाम के समय गायों के वापस आने पर उनका पंचोपचार पूजन करके उन्हें कुछ खाने को दें। आखिर में गोमाता के चरणों की मिट्टी को माथे पर लगाएं और उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम करें।