हिमाचल के जंगल से लौटे दर्जनों हाथी, मांसाहारी जीवों का भी बढ़ा कुनबा
नवाब खान, प्रतापनगर। एक सप्ताह पहले हुई बारिश के बाद नेशनल पार्क कलेसर में हाथियों से जंगल गुलजार हो गया है। भारी गर्मी के चलते हाथी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जंगलों में चले गए थे। अब कलेसर नेशनल पार्क में हाथियों के लौटने से रौनक हो गई है। पिछले एक सप्ताह से हाथियों के झुंड कभी नेशनल हाईवे तो कभी खेतों और यमुना के किनारे नजर आ रहा है।
वाइल्ड लाइफ विभाग के रिकॉर्ड में पांच साल पहले जहां चार हाथी दर्ज है। वहीं, अब इनकी संख्या 15 से ज्यादा हो गई है। वहीं, तेंदुओं समेत अन्य मांसाहारी जीवों की संख्या भी बढ़ी है। साल 2017 की गिनती में तेंदुओं की संख्या करीब 35 थी जो अब इनकी संख्या करीब 70 हो गई है। वन्यजीवों के संरक्षण के मद्देनजर वाइल्ड लाइफ ने 2022 में गणना की थी। 2022 की गणना के बाद वन्य जीवों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। एक साल पहले देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क से आया टाइगर अभी जंगल में मौजूद है।
विभाग के अनुसार तेंदुआ, हिरण, नीलगाय, बंदर, मोर, हाथी, जंगली बिलाव इत्यादि जानवरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चूंकि प्रदेश में यह जीव ही ज्यादा संख्या में पाए जाते हैं। इन वन्य जीवों की गणना के बाद केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इनके संरक्षण के लिए और अधिक प्रभावी कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।
वन्य जीवों की गिनती के काम में देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों से मदद ली जाती है। वन्य प्राणी विभाग की तरफ से वन्य प्राणियों की गिनती की पूरी रूपरेखा तैयार करके देहरादून वन्य प्राणी संस्थान को भेजा जा चुका है। संस्थान को केंद्र सरकार की ओर से वन्य प्राणी गणना के लिए नोडल एजेंसी बनाई गई है। गिनती शुरू करने से पूर्व विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा जाता है। गिनती के लिए जंगल में कई जगह सीसीटीवी लगाए गए हैं और जीव जानवरों के पैरों के निशान लिए जाते हैं जिससे गणना में आसानी रहे।
हर पांच साल बाद होती है जीवों की गणना
वन विभाग ने अपने स्तर पर साल 2012 में सर्वे किया था। इसमें कर्मचारियों ने पैदल चलकर पंजों के निशान से जीवों की संख्या का अध्ययन किया था। यह अध्ययन पुरानी पद्धति पर आधारित था, जिसमें जानवरों की संख्या स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाती है। उस दौरान कलेसर में आठ से 10 तेंदुए होने की बात सामने आई थी।
इसके बाद 2017 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को नेशनल पार्क में जानवरों की सही स्थिति का पता लगाने का काम दिया गया। इसमें इंस्टीट्यूट की टीमों ने यमुनानगर और पावंटा साहिब से सटे जंगल और पहाड़ियों में सर्वे किया। इस दौरान करीब 12 कैमरे लगाए गए थे। इसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कलेसर में तेंदुओं की संख्या 31 है। वहीं 30 जगहों पर 150 नीलगाय, 50 जगहों पर 80 मोर भी पाए गए थे। हालांकि उस समय हाथियों की संख्या का खुलासा नहीं किया जा सका था। अब एक बार फिर से जीवों की संख्या का सही पता करने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।
13422 एकड़ में फैला है जंगल
कलेसर नेशनल पार्क शिवालिक पहाड़ियों में वन्य प्राणी विहार 13422 एकड़ में फैला हुआ है। इसे 13 दिसंबर, 1996 को अधिसूचित किया गया था। कलेसर नेशनल पार्क उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और हिमाचल प्रदेश के सिंबल वाड़ा नेशनल पार्क की सीमाओं से सटा है। एक तरफ यमुना नदी बह रही है जिससे जीव-जंतुओं के लिए पेयजल उपलब्ध होता है।
2015 में किया गया था जंगल को सार्वजनिक
नेशनल पार्क आठ नवंबर 2015 से सार्वजनिक यात्रा के लिए खोला गया था। पार्किंग, विश्राम कक्ष, पेयजल जैसी सार्वजनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। वन्य प्राणी विभाग की ओर से दो सफारी गाड़ियों की व्यवस्था की है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद अब इनकी संख्या भी आधा दर्जन के करीब है। यह 16 किलोमीटर की यात्रा करवाती है।
15 फीट लंबे अजगर भी है यहां
वन्य जीव प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि नेशनल पार्क में एक टाइगर, 60 से 70 तेंदुआ, 13 से 15 हाथी हैं। इसके अलावा यहां पर 15 फीट तक लंबे अजगर भी हैं जो जंगल में दिखते हैं। विभाग के मुताबिक सांप रेक्टल प्रजाति के प्राणी हैं, जिनकी गणना संभव नहीं है। यहां तेंदुए, सांभर, चीतल, नीलगाय, भालू, बिल्ली, जंगली धब्बेदार बिल्ली, हाथी, लंगूर, बंदर, जंगली मुर्गे इत्यादि जानवरों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं।