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देसी शराब प्रकरण : गिरफ्तारी से बचने के लिए ठेकेदार ने लगाई अग्रिम जमानत याचिका

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- शराब माफिया मल्टीपल्स प्लेट लगाकर करते थे शराब सप्लाई
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संवाद न्यूज एजेंसी

यमुनानगर। 1200 पेटी देसी शराब प्रकरण मामले में पुलिस शराब ठेकेदार रिंकू पर कभी भी पकड़ बना सकती है। ऐसे में गिरफ्तारी से बचने के लिए ठेकेदार ने पहले ही कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उधर एसआईटी ने जिस मैसर्स एनवी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड बड़ौली अंबाला में कोर्ट से सर्च वारंट लेकर जांच की तो कई पुख्ता सुबूत हाथ लगे हैं।
इनमें लैपटॉप, प्रिंटर, इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस कब्जे में लिए हैं। जिनकी जांच होने पर और भी कई राज खुल सकते हैं। पुलिस एक्सपर्ट की मदद से इन डिवाइस को खुलवाएगी। ऐसे में पुलिस के चुंगल में बड़ी मछलियां फंस सकती हैं। हैरत की बात है आबकारी विभाग को भी इस प्रकरण के बारे में पता नहीं चला।
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उल्लेखनीय है पुलिस को सूचना मिली थी कि शराब से भरा एक कैंटर नेशनल हाईवे 344 से होता हुआ उत्तर प्रदेश की तरफ जाएगा। इस सूचना पर उनकी टीम ने नेशनल हाईवे 344 पर पिरथी का माजरा गांव के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की। अंबाला की तरफ से एक कैंटर आता दिखाई। पुलिस ने कैंटर को रोककर जांच की तो उसके अंदर से भारी मात्रा में देसी शराब से भरी पेटियां लदी हुई मिली। मामले की सूचना आबकारी विभाग को दी गई। जिसके बाद आबकारी निरीक्षक जगाधरी मोहन सिंह राणा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनके समक्ष कैंटर चालक से शराब के दस्तावेज मांगे गए। आरोपी ने गाड़ी में 1200 पेटी देसी शराब होने का परमिट दिखाया। यह परमिट 20 जून को शाम पांच बजकर 32 मिनट पर एमएच एनवी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड अंबाला से जारी किया हुआ दिखाया गया।
इस परमिट की वैधता 21 जून को दोपहर दो बजे तक की थी। परमिट के अनुसार यह शराब एमएस स्कोच स्टेशन वाइन जगाधरी को पहुंचाई जानी थी। उनकी टीम ने पेटियों को उतार कर जांच की। जांच के दौरान पेटियों पर लगे बार कोड को ट्रैक एंड ट्रेस के माध्यम से स्कैन किया गया। जिन पेटियों को स्कैन किया गया वह शराब की पेटियां एमएस स्कोच स्टेशन वाइन जगाधरी में पहले से स्टॉक इन दिखाई गई। इसके अलावा गाड़ी के अंदर से एक दूसरे नंबर की भी प्लेट मिली है।
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हमने सोमवार सुबह 11 से रात 12 बजे तक कोर्ट से सर्च वारंट लेकर बड़ौली में आबकारी विभाग के कमिश्नर के साथ मिलकर अभियान चलाया था। जहां हमें काफी सुबूत मिले हैं। करीब छह लाख बार कोड जो यूज किए हुए थे तथा मल्टीपल्स नंबर प्लेट मिली है जिन्हें ट्रकों पर लगाकर बाहर निकाला जाता था। अभी मामले में जांच जारी है।



-अभिलक्ष जोशी, डीएसपी जगाधरी।
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