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कारनामा : गंदा पानी एसटीपी में भेजने की बजाए पंपिंग स्टेशन से यमुना की जा रही मैली

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यमुनानगर। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती पर यमुना नहर में गिर रहे नालों को नगर निगम डायवर्ट कर रहा है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण यह है पब्लिक हेल्थ विभाग ने जिस पंपिंग स्टेशन में आजाद नगर व शांति कॉलोनी के नाले जोड़े गए, उसी से गंदा पानी चोरी छिपे नहर में गिराया जा रहा है। जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों का इस तरफ ध्यान नहीं है। इसके चलते नहर को दूषित होने से बचाने के लिए नाले डायवर्जन की योजना बेमानी साबित हो रही है।
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गौरतलब है कि कोई डेढ़ साल पहले एनजीटी ने शहरी क्षेत्र में पश्चिमी यमुना नहर में सीधे गिरते नालों की संख्या गिनाई थी। नगर निगम इनको डायवर्ट कर रहा है। ऐसे ही आजादनगर और शांति कॉलोनी, दोनों जगह से नालों के पानी का रुख पाइप लाइन डाल जिंदल पार्क से लगते पंपिंग स्टेशन में किया। यहां के नालों के डायवर्जन पर करीब 77 लाख खर्च करने के बावजूद इसका कोई लाभ नहीं दिख रहा। नियमानुसार पंपिंग स्टेशन से गंदे पानी को ट्रीट होने के लिए बाड़ीमाजरा के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) में भेजा जाना था लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। इसका कारण यह है कि आजाद नगर और शांति कॉलोनी के नाले नहर में सीधे गिरने से तो रोक दिए गए हैं, लेकिन पंपिंग स्टेशन से ही सामने नहर में पाइप के जरिए गंदा पानी चोरी छिपे नहर में गिराया जाने लगा है। इससे यमुना नहर का पानी दूषित हो रहा है।
विभाग मौन
इस मामले में पब्लिक हेल्थ के अलावा सिंचाई विभाग, नगर निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, पर ऐसा नहीं हो रहा। लगातार गंदा पानी नहर के पानी को दूषित कर रहा है। कभी रात के अंधेरे में तो कभी दिन में भी पंपिंग स्टेशन के सामने ही गंदा पानी नहर में मिल रहा है। वह भी तब जब मामले में एनजीटी की ओर से यमुना को दूषित होने से बचाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
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दूषित होती यमुना से आस्था को ठेस
यमुना बचाओ समिति के कार्यकारी अध्यक्ष संजय मित्तल ने कहा कि जिस जगह यमुना नहर में गंदा पानी गिर रहा है, उसके पास में बाड़ीमाजरा पुल समीप घाट पर शहर के लोग पूजन के लिए पहुंचते हैं, जिन्हें दूषित होती यमुना को देख आस्था पर ठेस पहुंच रही है। मामले को लेकर समिति डीसी को मांगपत्र सौंपेंगी।
वर्जन
जिस पंपिंग स्टेशन में दोनों नाले जोड़े गए, वह पांच एमएलडी क्षमता का था। इसकी क्षमता दस एमएलडी और बढ़ाई गई है। इसके बाद भी पंपिंग स्टेशन के सामने ही नहर में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है तो यह गलत है। मामले में जांच कर जिसकी भी लापरवाही मिलेगी, उस पर सख्त कार्रवाई अमल में लाएंगे।
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-सुमित गर्ग, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ।
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