संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/रादौर। कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से सोमवार को प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसमें डॉ. विशाल गोयल ने प्राकृतिक खेती का महत्व बताया।
उन्होंने प्राकृतिक खेती को रसायन मुक्त व पशुधन आधारित खेती बताया। प्राकृतिक खेती परिस्थितिकी प्रक्रियाओं पर आधारित होती है, जो खेत या उसके आसपास जीवों, पेड़-पौधों व सूक्ष्म जीवों की परिस्थितिकी तंत्र स्वरूप पर निर्भर करती है। भूमि का प्रबंधन करने से वातावरण से जहरीली गैसों को मिट्टी व पौधों में अवशोषित करने की क्षमता होती है।
उन्होंने खेती में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक अवयवों के दुष्परिणामों का भी उल्लेख कर प्राकृतिक व जैविक खेती को प्रथम पायदान पर रखा। प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले पदार्थ जैसे बीजाअमृत, जीवामृत, दशपर्णी अर्क, पंचगव्य, ब्रह्मास्त्र अग्नियास्त्र, फफूंद नाशक की आवश्यक सामग्री, बनाने व उपयोग विधि और उसके उपज में फायदे बताए।
कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. संदीप ने किसानों से कहा कि आज की परंपरागत खेती रसायनों पर ही निर्भर करती है और उपज की परस्पर प्रतिस्पर्धा ने भूमि की उर्वरा शक्ति को अति निम्न स्तर पर पहुंचा दिया है। इसका परिणाम यह होगा कि और अत्यधिक रसायनों का उपयोग किया जाना होगा, जिसके दुष्परिणाम शारीरिक, स्वास्थ्य व पर्यावरण स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि फिर हमें प्राकृतिक खेती व जैविक खेती की तरफ लौट कर जाना होगा। केंद्र के मुख्य सलाहकार डॉ. नरेंद्र गोयल ने फसलों में पोषण की पूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार के जैविक खादों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र का स्टाफ डॉ. कपिल सिंगला, डॉ. आराधना, डॉ. करण सैनी, डॉ. कविंद्र मौजूद रहे।