यमुुनानगर। जिन पहरेदारों के कंधों पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का भार है। वे कितने फिट हैं। इसका खुलासा जल्द ही मेडिकल जांच प्रक्रिया से होगा। दरअसल काफी समय से पुलिसकर्मियों की फिटनेस को लेकर काफी समय से सवाल उठते रहे हैं। कभी पुलिसकर्मियों की बढ़ती तोंद (पेट) ड्यूटी में बाधा डालती है तो कभी अन्य बीमारियां। ऐसे में अब पुलिस विभाग ने पुलिसकर्मियों की फिटनेस को जांचने का निर्णय लिया है।
जिले में जिन 35 वर्ष से अधिक आयु के पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराया जाना है उनकी संख्या जिले में करीब 850 है। पुलिस मुख्यालय की तरफ से इन पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराने के लिए लिखा गया है। जिसके लिए डीएसपी हेडक्वार्टर सुभाष चंद को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। डीएसपी ही शेड्यूल बनाकर पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराएंगे। इसके लिए वह सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया से भी मिल चुके हैं।
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कई पुलिसकर्मियों की बढ़ी हुई है तोंद
काफी पुलिसकर्मी ऐसे हैं जिनकी तोंद (पेट) बढ़ी हुई है। कुछ तो ऐसे भी हैं जो मोटापे के चलते ठीक से चल भी नहीं पाते। जिसका फायदा कई बार अपराधी उठा लेते हैं। समय-समय पर पुलिस के कब्जे से आरोपियों के छूट कर भागने की वारदात भी होती रहती हैं। पुलिसकर्मियों ने आरोपियों का पीछा तो किया परंतु वह उनके हाथ नहीं आए। इसकी बड़ी वजह पुलिसकर्मियों का पूरी तरह से फिट नहीं होना भी है।
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शारीरिक रोग ही नहीं तनाव के भी शिकार
पुलिसकर्मी केवल मोटापे या अन्य शारीरिक रोगों से ही नहीं बल्कि तनाव के भी शिकार हैं। पुलिसकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब पुलिस का काम काफी बढ़ गया है। आबादी के हिसाब से पहले ही पुलिसकर्मियों की कमी है। रोजाना धरने, प्रदर्शन हो रहे हैं। कई बार तो सुबह से देर रात तक सड़क पर खड़े रहना पड़ता है। जिस कारण वह अपने परिवार को भी पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। वह दिनभर काम करते हैं और घर जाने पर परिजनों से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा हो जाता है। जिससे वह तनाव का शिकार हो रहे हैं।
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35 साल से अधिक आयु के सभी पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराया जाना है। मेडिकल से सभी की फिटनेस का पता चलेगा। रिपोर्ट में यदि किसी पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य में कोई कमी पाई जाती है तो उसका उपचार कराया जाएगा।
-सुभाष चंद, डीएसपी हेडक्वार्टर