यमुनानगर। जिले में हेपेटाइटिस-ए की बीमारी ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। यह चिंता का विषय इसलिए भी है, क्योंकि 10 साल बाद हेपेटाइटिस-ए के इतने मरीज पहली बार मिले हैं। गत तीन माह में इसके 36 केस सामने आ चुके हैं। गंदा पानी पीने व खराब भोजन, दूषित फल व सब्जी खाने से यह रोग होता है।
हेपेटाइटिस-ए से हेपेटाइटिस बी व सी ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि इनसे न केवल लीवर कमजोर होता है बल्कि लीवर का कैंसर भी हो सकता है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि जिन लोगों में हेपेटाइटिस-ए मिला है, उनमें इसके लक्षण बिल्कुल भी नहीं थे। इन लोगों को डायरिया जरूर हुआ था।
हेपेटाइटिस-ए के ज्यादातर केस उन जगहों पर मिले हैं, जहां पर पिछले दिनों डायरिया फैला था। घरों में गंदा पानी सप्लाई होने से लोग डायरिया का शिकार हो गए थे। इससे लोगों में उल्टी-दस्त व पेट में इंफेक्शन की शिकायत हुई। हेपेटाइटिस-ए के सभी 36 केस जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में मिले हैं।
मुकारबपुर गांव में 22 अगस्त को डायरिया फैलने से 127 लोग इसके शिकार हो गए थे। डायरिया फैलने का कारण पेयजल की पाइप लाइन में तालाब व खेतों का पानी मिलना बताया गया था। गांव से 14 लोगों के रक्त के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें नौ केस हेपेटाइटिस-ए पॉजिटिव मिले। गांव में किसी में भी इसके लक्षण नहीं थे।
गत सप्ताह महलांवाली गांव में पानी लीकेज होने से 34 लोग डायरिया से ग्रस्त हो गए। गांव में चार जगह पानी की लीकेज थी। सभी बीमार लोग एक ही गली में रहने वाले थे। स्वास्थ्य विभाग ने गांव के 24 लोगों के रक्त के सैंपल लिए।
इनमें से चार लोगों में हेपेटाइटिस-ए होने की पुष्टि हुई। गांव की आबादी 4995 है और यहां 946 घर हैं। पेयजल लाइन लीकेज होने से घरों में टैंकर से पानी की सप्लाई की गई। इससे पहले शहर के कीर्ति नगर, शर्मा कॉलोनी, रणजीत कॉलोनी में भी गंदा पानी पीने से लोग बीमार हो गए थे। कीर्ति नगर में पानी का एक सैंपल अनफिट मिला था। साथ ही रक्त के 11 नमूनों की जांच करने पर हेपेटाइटिस-ए के तीन मरीज मिले। यहां हेपेटाइटिस-सी के भी तीन केस मिले थे। जबकि रणजीत कॉलोनी में 24 में से 12 लोगों में हेपेटाइटिस-ए मिला था। संवाद
हेपेटाइटिस-ए के लक्षण
हेपेटाइटिस-ए होने पर आंखों और त्वचा का रंग पीला, मूत्र का गहरा रंग, पेट दर्द, भूख में कमी, बुखार, उल्टी होने का मन करना, थकान व दस्त होने लगते हैं। हेपेटाइटिस-ए वाले बच्चों में आम तौर पर कम लक्षण दिखाई देते हैं। 10 से 15 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं जो लंबे समय तक इसकी चपेट में रहते हैं। हेपेटाइटिस-ए का अभी तक कोई उपचार नहीं है। डॉक्टर से रूटीन चेकअप, दवाइयां और नशे से परहेज करके इससे बचा जा सकता है।
हेपेटाइटिस-ए के इतने केस कई सालों के बाद सामने आए हैं। हेपेटाइटिस-ए से ज्यादा बी व सी अधिक खतरनाक होता है। कुछ कॉलोनियों में डायरिया के केस मिले थे। वहीं पर इसके केस ज्यादा मिले हैं। लोग दूषित खाना, फल, सब्जी खाने व गंदा पानी पीने से बचें। - डॉ. वागीश गुटैन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी।