संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वंशिका भारती ने कहा कि प्रेम मानव जीवन की सबसे सुंदर और दिव्य अनुभूति है।
उन्होंने बताया कि प्रेम केवल भावनाओं का आकर्षण नहीं अपितु प्रेम वह अवस्था है जहां हृदय में स्वार्थ समाप्त होकर समर्पण, करुणा और आत्मीयता का उदय होता है। मनुष्य संसार में अनेक संबंधों को प्रेम का नाम देता है, किंतु वास्तविक प्रेम की पहचान तब होती है, जब उसमें अपेक्षा के स्थान पर समर्पण और अधिकार के स्थान पर त्याग की भावना जन्म ले।
उन्होंने कहा कि सांसारिक प्रेम प्रायः परिस्थितियों, अपेक्षाओं व संबंधों पर आधारित होता है, इसलिए समय और परिस्थितियों के साथ उसमें परिवर्तन आ सकता है। जब हमारी अपेक्षाएं पूरी होती हैं तो हमें प्रेम का अनुभव होता है और जब अपेक्षाएं टूटती हैं तो वही संबंध पीड़ा का कारण बन जाते हैं। इसके विपरीत गुरु का प्रेम शिष्य के कल्याण और आत्मिक उत्थान पर आधारित होता है।
उन्होंने कहा कि जब हृदय में गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और प्रेम जागृत होता है, तो आंतरिक परिवर्तन घटित होता है और मनुष्य बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठकर अपने भीतर की शांति व आनंद का अनुभव करता है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु महिमा का गुणगान किया।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान प्रवचन करतीं साध्वी। संस्थान