संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम के गठन को 16 साल बीत चुके हैं। निगम अब तक अपनी पूरी जमीन का रिकॉर्ड तैयार नहीं कर सका है। निगम की इस लापरवाही का फायदा उठाकर कई जगह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। कुछ जगह कब्जाधारियों ने पक्के निर्माण तक कर लिए हैं और इनमें दुकानें व शोरूम चल रहे हैं।
जगाधरी-यमुनानगर में नगर निगम से पहले नगर पालिका थी। शहर की बढ़ती आबादी और सरकार को मिलने वाले राजस्व को देखते हुए वर्ष 2010 में नगर निगम का गठन किया गया था। उस समय शहरी क्षेत्र से लगते 42 गांवों को भी निगम में शामिल किया गया था। इन गांवों में पहले ग्राम पंचायतें थीं और पंचायतों के पास सरकारी जमीन थी।
पंचायतें अपनी जमीन की नीलामी कराकर मिलने वाली राशि गांव के विकास पर खर्च करती थीं। नगर निगम बनने के बाद इन 42 गांवों की कई हजार एकड़ जमीन भी निगम के अधीन आ गई। पार्षदों का आरोप है कि निगम अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि पंचायतों से कितनी जमीन उसके पास आई थी। इसी कारण निगम की जमीन की सही स्थिति और क्षेत्रफल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वार्ड 13 के पार्षद श्याम लाल के अनुसार हमीदा हेड के नजदीक नगर निगम की करीब 27 एकड़ कृषि योग्य जमीन है। इस जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिशें हो रही हैं और लोग इसका निजी इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह मामला नगर निगम सदन की बैठक में भी उठाया था। आयुक्त ने जमीन को कब्जामुक्त कराने का आश्वासन दिया है।
पार्षद बोले - जमीन की हो तारबंदी
पार्षद प्रियांक शर्मा, जयंत स्वामी और विक्रम राणा ने कहा कि 16 साल में निगम की जमीन का रिकॉर्ड तैयार नहीं होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। निगम के पास 4,000 एकड़ से अधिक जमीन होने की बात कही जा रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति निशानदेही के बाद ही स्पष्ट होगी। उनकी मांग की कि पहले निगम की सभी जमीन की निशानदेही करवाई जाए। इसके बाद सीमा निर्धारित कर पत्थर या पोल लगाए जाएं और कंटीली तार से तारबंदी की जाए, ताकि सरकारी जमीन पर नए कब्जे न हो सकें।
निशानदेही के लिए एजेंसी की तलाश : महाबीर
नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद का कहना है कि नगर निगम की जमीन की निशानदेही के लिए एजेंसी की तलाश की जा रही है। इसके लिए चार बार निविदा भी जारी की जा चुकी है, लेकिन कोई एजेंसी काम करने के लिए आगे नहीं आई। एजेंसी द्वारा निशानदेही कर रिपोर्ट देने के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। जब तक एजेंसी नहीं मिलती, तब तक निगम अपने स्तर पर नोटिस जारी कर अवैध कब्जे हटवाने की कार्रवाई करेगा।