एक सरकारी स्कूल में चपरासी होने के बावजूद छात्राओं से बर्तन साफ करवाने का मामला सामने आया है। जब अध्यापकों से इस बाबत पूछा तो उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने जो चपरासी और सफाई कर्मचारी नियुक्त किए हैं, वे ज्यादा पढ़े लिखे हैं। इसलिए उन्हें काम कहते अच्छा नहीं लगता।
उनके जवाब के साथ जब डीईओ जोगेंद्र हुड्डा से पूछा गया तो उन्होंने भी हैरानी जताई और कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया गया उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार की ओर से पिछले वर्ष ग्रुप डी की भर्ती के तहत सरकारी स्कूलों व विभागों में चपरासी व सफाई कर्मचारियों की भर्ती भी की गई हैं, लेकिन ज्यादा पढ़ाई लिखाई होने के कारण जहां उन्हें चपरासी का काम करने में दिक्कत आ रही है।
वहीं दूसरी ओर अन्य अधिकारियों को उनसे काम करवाने में शर्म आ रही है। यही हाल जिले के कई सरकारी स्कूलों का ही नहीं अन्य विभागों का है। सरकारी स्कूलों में इसका खामियाजा स्कूल के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उनसे पढ़ाई अतिरिक्त अन्य काम भी लिया जा रहा है।
वैसे तो स्कूल के अध्यापक 25 फरवरी से बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं की बात कर रहे है, लेकिन बच्चों की परीक्षाओं की तैयारियों की तरह किसी का ध्यान नहीं है। अगर बच्चे स्कूल में बर्तन धोने का काम करेंगे तो वो पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे।
स्कूल के फिजिक्ल अध्यापक ने बताया कि स्कूल में चपरासी ना होने के कारण छात्राओं से कभी कभार काम करवा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्कूल में कैंटीन नहीं है, इसलिए अध्यापिकाएं स्कूल में चाय बना लेतीं है तो उनके बर्तन छात्राओं से धुलवा जाते है। उन्होंने कहा कि स्कूल में ओर भी बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।