छछरौली। हरियाली लाने के लिए वन विभाग की स्थानीय रेंज में चार लाख पौध तैयार की जा रही है। इसमें एक लाख पॉपुलर तो तीन लाख छायादार, फलदार और औषधीय पौधे शामिल हैं।
वहीं छछरौली वन क्षेत्रफल लगभग 55 वर्ग किलोमीटर है। वहीं जिले के आंकड़ों की बात करें तो जिले के ज्योग्राफिकल के 17.94 प्रतिशत क्षेत्र में 60 लाख 94 हजार पेड़ खड़े है। छछरौली रेंज की नर्सरी में पॉपुलर के अलावा नीम, बड़, पीपल, पिलखन, कुसुम, मौलसरी, बहेड़ा, शीशम, सफेदा, पॉपुलर, तुन, सांगवान, सिमल, अर्जुन, खैर, ढांक, हरड़, जंगल जलेबी, पहाड़ी पापड़ी, जकरंडा, अमलतास, कचनार, हाथी फल, पुत्र जीव, आम, जामुन, अमरूद, अनार, इमली, नींबू, आंवला, बेलपत्र, आदि पौध तैयार की जा रही है।
इनमें त्रिफला चूर्ण तैयार करने वाले पौधे भी शामिल हैं। यह पौधे गांवों के अलावा, सड़कों के किनारे सरकारी जमीन, शामलात समेत खाली एरिया में भी लगाए जाएंगे।
इसके अलावा लोगों को भी मुफ्त में पौधे भी दिए जाएंगे। कस्बे की छछरौली, कोट व डारपुर नर्सरी में तैयार हो रही पौध को लगाने के लिए जून जुलाई, व अगस्त माह में पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इन माह में पौधरोपण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मानसून के मौसम के अनुकूल होता है।
मानसून में बारिश का पानी पौधों को भरपूर मात्रा में मिलता है, जिससे वे तेजी से बढ़ते हैं। जून में पौधरोपण करने से पौधों को बारिश के पानी का लाभ मिलता है और वे अच्छी तरह से स्थापित हो जाते है। चूंकि इन महीनों में पौधों को बारिश मिलती है। चाहे फिर पानी के टैंकर, बोरवेल आदि से कितना भी पानी इस्तेमाल करें, पौधों में असली वृद्धि और जीवन बारिश के बाद ही आता है। संवाद
इस बार नर्सरी में चार लाख पौधों के लिए पौध तैयार की जा रही है। इस कस्बे का वन क्षेत्र बढ़ेगा तथा पर्यावरण को भी बढ़ावा मिलेगा। तीनों नर्सरी छछरौली, कोट व डारपुर पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है। - दिनेश पूनिया, रेंज ऑफिसर, छछरौली कलसिया रेंज।