छेड़छाड़ से तंग आकर मिट्टी का तेल छिड़कर जान देने वाली छात्रा के मामले मेें कोर्ट ने दोषी को चार साल कैद और 6500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है।
कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 11 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल ने फैसला सुना दिया।
18 मार्च 2013 को उन्हें सूचना मिली थी कि भूड़कलां निवासी स्कूली छात्रा मीनू ने स्वयं पर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा ली। गंभीर हालत में उसे यमुनानगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने पीजीआई चंडीगढ़ पहुंच कर पीड़ित युवती का बयान दर्ज किया।
छेड़छाड़ से तंग आकर लगाई थी आग
ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत पाल सिंह (जेएमआईसी चंडीगढ़) की मौजूदगी में पुलिस को दिए बयान में मीनू ने कहा कि वह स्कूल में पढ़ती है। जब वह स्कूल आती-जाती है, तो पड़ोस में रहने वाला युवक तैयब पुत्र महबूब उसका पीछा करता है। स्कूल के अंदर जाने के उपरांत वह बाहर खड़ा रहता है। इस कारण उसकी बदनामी हो रही है। इस वजह से उसकी सहेलियां भी उसे परेशान करती हैं। हालांकि उसने इस संदर्भ में अपनी मां को भी बताया था। इसके उपरांत उसकी मां, युवक के पिता महबूब से मिलने उनके घर गई और पूरी घटना के बारे में अवगत कराया। इसके उपरांत महबूब ने अपने बेटे तैयब को डांटा भी था। इसके बाद कुछ दिनों तक उसका पीछा करना छोड़ दिया। लेकिन जब उसकी परीक्षाएं चल रही थी, तो फिर से उसने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। इस बारे में उसने अपनी मां को बताया कि वह परीक्षा देने के लिए नहीं जाएगी, क्योंकि तैयब ने फिर से उसका पीछा करना शुरू कर दिया है। इसके बाद उसकी मां ने उसे साथ चलने के लिए कहा, साथ ही कहा कि वह इस संदर्भ मेें उस लड़के से भी बात करेगी। पीड़िता के मुताबिक 18 मार्च 2013 को बदनामी के डर से उसने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़कर कर स्वयं को आग लगा दी। इसके चलते पीजीआई में उसकी मौत हो गई।