संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। किसान के लिए खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। इसका मुख्य कारण सरकार का किसान के हित में सही से काम न करना है। यह बात भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने रविवार को कस्बा के विश्राम गृह में किसानों से बात करते हुए कही। वह अंबाला के नारायणगढ में जाते हुए कुछ देर के लिए व्यासपुर रेस्ट हाउस में रुके थे।
उन्होंने कहा कि 1967 में किसान खुशहाल हुआ करता था। गेहूं बेच कर किसान डीजल, मकान बनाने के लिए ईंट व अन्य जरूरी वस्तुएं खरीद सकता था। परंतु सरकार द्वारा अलग-अलग राज्यों में फसलों के भाव अलग दिए हुए हैं। चीनी पूरे देश में एक रेट पर मिलती हैं।
मुश्किल से एक-दो रुपये का फर्क किसी राज्य में हो सकता है, परंतु गन्ने के भाव सभी प्रदेशों में अलग हैं। सरकार की नीतियां किसान को कमजोर करने का काम कर रही हैं। किसान की अनदेखी किसानों के बच्चों को खेती से विमुख कर रही है। मौजूदा समय में फसलों के मूल्य इतने कम है की उनका गुजारा नहीं हो सकता। जमीन किसान की माता समान है इसलिए किसान जमीन नहीं बेच सकता। प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि आज भी प्रदेश में यूनियन लगातार किसानों के साथ खड़ी हैं।
पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या पर नरेश टिकैत ने कहा कि यह बहुत ही निंदनीय घटना है। किसान यूनियन इसकी निंदा करती हैं। पर्यटकों के परिवारों को सरकार उचित मुआवजा दे।