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किसानों उम्मीद टूटी, हाथ लगी मायूसी
किसान बोले : कर्ज माफी व एमएसपी पर सरकार ने साधी चुप्पी, बजट में किसानों का नहीं रखा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट से किसानों को निराशा हाथ लगी। किसान को उम्मीद थी कि सरकार किसानों को खुश करने के लिए उनकी कर्ज माफी, एमएसपी पर फसलों की खरीद या फिर डीजल सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की घोषणा कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिस कारण किसानों को मायूसी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। आम बजट को लेकर किसानों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।
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किसान विरोधी है बजट : हरपाल सिंह
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सुढल का कहना है कि लोकसभा में सरकार ने जो बजट पेश किया है उससे किसानों की झोली खाली रही। किसान कर्ज के बोझ तले दबा है, उम्मीद थी कि सभी किसानों का कर्जा माफ हो सकता है। डीजल का रेट 85 रुपये पर पहुंच गया है। ऐसे में बजट देख कर सभी किसानों को काफी निराशा हुई है। यह बजट पूरी तरह से किसान विरोधी है।
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खाली रही किसानों की झोली : पिंटू राणा
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू राणा खानपुर का कहना है कि फसलों पर लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है। यूरिया, डीजल, दवाइयां व कृषि उपकरण महंगे हो चुके हैं। किसान सालभर गर्मी, सर्दी व बरसात में खेत में काम करता है। फिर भी किसान को इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि वह परिवार का गुजारा आसानी से कर सके। फसल का लाभकारी मूल्य भी आज किसान को नहीं मिल रहा। इस बजट से किसानों की झोली खाली रही।
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प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे रही सरकार : रामबीर चौहान
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर सिंह चौहान का कहना है कि सरकार ने पीपीपी मोड़ में नई योजनाएं शुरू करने की बात कही है। ऐसा करके सरकार प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाहती है। कम से कम किसान को फसल का इतना रेट तो दिया जाए कि उसका लागत मूल्य मिल जाए। अब खेती घाटे का सौदा बन गई है। सरकार को किसानों की चिंता बिल्कुल भी नहीं है।
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किसानों पर ध्यान नहीं दिया : ईश्वर सिंह
गांव टोपरा कलां निवासी किसान ईश्वर सिंह का कहना है कि किसानों को फसलों के लिए खाद नहीं मिलता। बिजली के बिल लाखों रुपये में पहुंच गए हैं। अब तो खेती में किसान के लिए कुछ नहीं रह गया है। बजट से उम्मीद थी सरकार कर्जा माफ करेगी और फसलों के लिए मुफ्त में दवाइयां उपलब्ध कराने की घोषणा करेगी। परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एमएसपी लागू होगी या नहीं इस पर सरकार ने एक शब्द भी नहीं कहा।
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झूठे सपने दिखा रही सरकार : ध्यान सिंह
गांव सुढैल निवासी किसान ध्यान सिंह का कहना है कि सरकार ने बजट में कहा है कि किसान आर्गेनिक खेती करें। इस खेती के लिए खेत को चार से पांच साल तक खाली छोड़ना होता है। उसमें कोई दवाई नहीं डाली जाती। यदि इतने साल खेत खाली छोड़ दिया तो किसान व उसका परिवार खाएगा क्या। या तो सरकार इतने साल में जितने की फसल होती है उसकी कीमत किसान को दे। ऐसे झूठे सपने किसानों को बजट में दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की गई है।