भूमि अधिग्रहण कानून में किए गए संशोधन के विरोध में शुक्रवार को सैकड़ों किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने लघु सचिवालय के गेट पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया और पुतला फूंका। किसानों ने डीसी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और संशोधन कानून रद्द करने की मांग की। वहीं किसानों ने गन्ना समर्थन मूल्य में पांच रुपये की वृद्धि को उनका मजाक बताया। प्रदर्शन की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना, किसान सभा अध्यक्ष जरनैल सिंह सांगवान, विजयपाल ने की। किसानों ने मांग की कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए गन्ने के मूल्य में कम से कम 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की जाए।
अनाजमंडी गेट पर किसानों मजदूरों को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन किया है। इसके तहत अब सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रोजेक्ट के लिए भी किसानों की सहमति के बिना भूमि पर अधिग्रहण कर सकेगी। नेताओं ने कहा कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस कानून में संशोधन किया है। इस कानून से कंपनी जमीन की मालिक बन जाएंगी और किसान भूमिहीन होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाएगा। इसी प्रकार केंद्र सरकार ने कृषि संबंधी तीनों कानून किसानों के हित में बताए और पूंजीपतियों का हित साधा।
संजू गुंदियाना ने कहा कि पहले पीपीपी मोड के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी थी, लेकिन अब किसानों की सहमति जरूरी नहीं है। जमीन अधिग्रहण करने के लिए सेक्शन 4 और सेक्शन 6 के लिए नोटिफिकेशन होती थी, अब कलेक्टर सीधे तौर पर जमीन अधिग्रहण कर सकेंगे। पहले लोगों को पुनर्वास की व्यवस्था की जाती थी, जमीन मालिक को दूसरी जगह घर बनाने के लिए प्लाट दिया जाता था। लेकिन अब इस प्रकार की सुविधा किसानों को नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनों व चहेतों के लिए यह कानून बनाया है। किसान अपनी भूमि छिनने नहीं देंगे। इसके लिए कानून रद्द होने तक लड़ाई करेंगे। प्रदर्शन को जरनैल सिंह सांगवान, धर्मपाल चौहान, सतपाल कौशिक, महीपाल चमरौडी, हरभजन सिंह संधू, मानसिंह मंडेबर, गुरबीर सिंह, जगतार कड़कौली, अजमेर सिंह ने संबोधित किया।