राबिया ने कहा कि पांच दिन से जारी बारिश ने यहां के लोगों को घरों में कैद कर दिया है। बारिश रुकती है, पर घरों के बाहर गलियों में तीन फीट तक भरा पानी कम नहीं हो रहा। ऐसे में वह अपने निजी काम के अलावा किसी के सुख-दुख में भी नहीं जा पा रहे हैं।
मुकेश कुमार ने कहा कि तीन फीट पानी के बीच बाइक से निकलने का प्रयास किया, पर वह भी बंद पड़ गई। उसे ठीक कराने के लिए मैकेनिक पर ले जाना भी मुश्किल हो गया है। घर पर दवा की जरूरत थी, तब हाथों में चप्पल लिए और पेंट कुछ गोडो तक चढ़ाकर बाजार से दवा लेकर आया।
सोनू जोगी ने कहा कि अधिकारी ग्रामीण इलाकों में भरे बारिश के पानी का मौका कर राहत कार्य करवा रहे हैं, पर शहर में ही जिला हेडक्वार्टर से कुछ दूरी तेजली समीप उनके यहां पांच दिन से तीन फीट पानी भरा है। जो बारिश रुकने पर भी नहीं उतर रहा। जिसे निकालना तो दूर कोई अधिकारी यहां मौका करन भी नहीं आया है।
सियाराम ने कहा कि यहां गलियां-सड़कें भी नहीं बनी। इससे पांच दिन से भरे तीन फीट पानी के नीचे भी कीचड़ जमा है। अगर पैदल भी पानी से निकलने का प्रयास किया तो फिसलकर गिरने का घर है। इसलिए पेंशन का पता करने जाना था, पर हालात देख घर के बाहर नहीं निकल पाए।
अजीत ने कहा कि पांच दिन की बारिश ने उस सहित आसपास के बाकी बच्चों व किशोरों की पढ़ाई व खेल छूट रहे हैं। क्योंकि इसके लिए वह घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहा हैं। मोबाइल के सहारे ही पढ़ाई, खेल व मनोरंजन में पूरा दिन निकल रहा है।
कुसुम ने कहा कि शुक्र है स्कूलों की चार दिन छुट्टी हो गई, क्योंकि स्कूल खुलते तो भी बच्चों को स्कूल ना भेज पाते। गुरुवार को स्कूल खुलने हैं, तब भी बारिश का पानी नहीं उतरा तो भी बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाएंगे। क्षेत्र के पीछे ट्यूबवेल के पास कचरा डंप होता है, इसलिए बारिश के पानी में जौंक, सांप व अन्य जहरीले जीव भी निकल रहे हैं। इससे डर का माहौल बना हुआ है।