जल है तो जीवन है..., पानी अमूल्य है, इसे बचाइए..। ये स्लोगन जलापूर्ति विभाग के कार्यालय में लिखे नजर आते हैं। वहीं लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित करने के लिए विभाग लाखों रुपये पानी में बहा रहा है लेकिन पानी बचाने के लिए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुद ही गंभीर नहीं हैं। मॉडल कॉलोनी स्थित पानी की टंकी में स्टोर किए गए करीब दो लाख लीटर पानी को नाली में बहा दिया गया।
महाराणा प्रताप पार्क में जलापूर्ति विभाग की पानी की टंकी है, जिसकी क्षमता करीब 50 हजार गैलन है। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे टंकी के पानी को पार्क के बाहर लगे पाइप के माध्यम से सड़क पर गिराया जाने लगा। करीब तीन इंच चौड़े पाइप से पानी की तेज धार गिरती रही। आधे घंटे में ही आसपास जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। स्वच्छ पेयजल सड़कों से होता हुआ नाली में जाता रहा।
सड़क पर बह रहे पानी को देखकर लोग भी हैरान रह गए और विभाग को कोसते नजर आए। इस दौरान वहां से निकलने वाली कई कार चालकों ने पानी की बौछार के नीचे कार खड़ी कर उसकी धुलाई की। वहीं बच्चे भी घंटों पानी में नहाते रहे। महाराणा प्रताप पार्क में जलापूर्ति विभाग के कर्मचारी खुदाई कर पाइप लाइन की लीकेज को ठीक कर रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि पाइप की लीकेज ठीक करने के लिए टंकी को खाली किया जा रहा है। करीब सवा ग्यारह बजे टंकी खाली हो गई।
पार्क के पेड़-पौधे सूखे, पानी डाल दिया नालियों में
सड़क पर बहते पानी को देखकर महाराणा प्रताप पार्क का माली रामकुमार भी दुखी नजर आया। उसने बताया कि पार्क में लगे पेड़-पौधों को पार्क में लगे नलकूप से पानी मिलता है लेकिन प्रेशर कम होने से पेड़-पौधों को पूरा पानी नहीं मिल पाता। माली ने बताया कि सड़क पर पानी बहा रहे कर्मचारियों को उसने पाइप का मुंह घुमाकर पार्क के अंदर करने को कहा था, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। यदि पानी पार्क में ही डाल देते तो पेड़-पौधों को कई दिन तक पानी देने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
पानी की बर्बादी देखकर लोग हुए दुखी
पार्क के सामने रहने वाली अमरजीत कौर ने कहा कि सुबह से सड़क पर पानी गिर रहा था, लेकिन किसी ने आकर इसे बंद नहीं किया। कुछ दिन पहले भी इसी तरह सड़क पर काफी देर तक पानी बहता रहा था।
गर्वित ने कहा कि नालियों में बहाए गए पानी सैकड़ों लोगों की प्यास बुझ सकती थी। जब विभाग खुद पानी की बर्बादी कर रहा है तो दूसरों को पेयजल बचाने का दिखावा क्यों करता है।
गुलशन वोहरा ने कहा कि पानी को सड़क पर बहाने के बजाय वाल्व बंद करना चाहिए था।
अतुल त्यागी ने कहा कि हजारों लीटर पानी सड़क पर बह गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
समझदारी से काम लेते अधिकारी
लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वाटर एंड सेनिटेशन स्पोर्ट आर्गनाइजेशन का गठन कर जिला स्तर पर जिला कंसलटेंट नियुक्त किए हैं। जिला कंसलटेंट अधिकारी रजनी गोयल ने कहा कि इस तरह पानी को नालियों में बहाना गलत है। यदि अधिकारी थोड़ी समझदारी से काम लेते तो इस पानी को टैंकरों में पानी की कमी वाले इलाके में भिजवाया जा सकता था।
जलापूर्ति विभाग के जेई परमिंद्र सिंह से सीधी बात
सवाल : दो लाख लीटर पानी सड़क पर क्यों बहा दिया गया? पानी नालियों में बहाने के बजाय टंकी का वाल्व बंद किया जा सकता था। जवाब : टंकी को साफ करने के लिए उसे खाली किया गया है।
सवाल : पानी को नालियों में बहाने के बजाय उसे जरूरतमंद इलाकों में भिजवाया जा सकता था?
जवाब : हमारे टैंकर जरूरतमंद इलाकों में पानी पहुंचाते हैं।
सवाल : पार्क में पेड़-पौधे सूखे पड़े हैं। पार्क में ही पानी डाल देते।
जवाब : दोबारा ऐसी स्थिति आई तो पानी को पार्क में डाल देंगे।
जलापूर्ति विभाग के एसडीओ सुमित गर्ग ने माना कि पानी को व्यर्थ बहाने के बजाय उसे इस्तेमाल में लाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि भविष्य में पानी की बर्बादी न होने दें।