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प्रदेश सरकार के खिलाफ गरजे कर्मचारी

Thu, 09 Jul 2015 12:18 AM IST
ब्ूयरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के विरोध में बुधवार को विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी सड़क पर उतर आए। कर्मचारियों ने सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले एनएच 73 व लघु सचिवालय में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। लगभग आधे घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद कर्मचारियों ने सीटीएम बिजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों को वापस सेवा में लेने की मांग की। वहीं मांग पूरी न होने पर 14 जुलाई से भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी बुधवार सुबह जगाधरी अनाज मंडी गेट पर एकत्रित हुए। सरकार द्वारा अतिथि अध्यापकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने यहां प्रदर्शन किया।

संघ के प्रधान सतीश राणा के नेतृत्व में सभी कर्मचारी यहां से सरकारी विरोधी नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे 73 से रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सीटीएम बिजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर हटाए गए कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखने की मांग की।
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कर्मचारियों नेताओं ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समय जारी घोषण पत्र में गेस्ट टीचरों, अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने, पंजाब के समान वेतनमान देने, 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतनमान देने, वेतन विसंगतियां दूर करने के वादे किए थे लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को नौकरी से निकलना शुरू कर दिया।

सरकार ने अतिथि अध्यापकों, अनियमित कर्मचारियों, कंप्यूटर टीचर, कंप्यूटर लैब सहायक, अनुबंधित अध्यापक को हटा दिया। मंच संचालन हरिओम कश्यप व सचिव महीपाल चमरौडी ने किया। प्रदर्शन में जयपाल ढींगरा, बलबीर सिंह, अविनाश शर्मा, मनजीत कौर, पूनम, जरनैल सांगवान, शोभन सिंह, सुरेंद्र सैनी, महीपाल सोडे, रजनीश शर्मा, रामकुमार कांबोज, दिनेश तंवर, सुभाष चंद, नंद पाल आदि ने संबोधित किया।

तो कैसे सफल होगा डिजिटल इंडिया का सपना  
संघ के जिला प्रधान सतीश राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया के सपने दिखा रहे हैं, लेकिन स्कूल में न तो कंप्यूटर टीचर हैं और न ही कंप्यूटर लैब सहायक। ऐसे में डिजिटल इंडिया का सपना कैसे सफल होगा। स्कूलों में पद खाली पड़े हैं, जबकि अतिथि अध्यापकों को सरप्लस घोषित करके नौकरी से बाहर निकाल दिया गया है। निजीकरण नीति के तहत सभी विभागों में सरकार बजट में कमी कर रही है। शिक्षा विभाग में 16.51 स्वास्थ्य विभाग में 5.61, बाल विपका में 55 प्रतिशत बजट कम दिया गया है। इस तरह बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कैसे की जाए।
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