यमुनानगर। वर्षों से सुनते आए हैं कि गांवों का वातावरण शहरों से काफी अच्छा होता है। गांवों में सांस लेने को शुद्ध हवा मिलती है, वहां हरियाली है जो सेहत को ठीक रखती है। परंतु गांवों के साफ सुथरे वातावरण में शहर से निकल रही डिच ड्रेन का पानी जहर घोलने का काम कर रहा है। डिच ड्रेन से लगते गांवों में लोग कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
ड्रेन में जमा फैक्टरियों के केमिकल युक्त पानी से न केवल कई किलोमीटर तक का एरिया दुर्गंध वाला हो गया है बल्कि इसका सीधा असर भूजल पर भी पड़ रहा है। ड्रेन का पानी जमीन में रिसने से भूजल भी विषैला हो गया है। जिसे पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। इसे पीते ही गला खराब हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से ड्रेन बनी है तब से ड्रेन के साथ लगते गांवों में कैंसर, एलर्जी समेत अन्य बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं।
13.71 करोड़ रुपये से बनाई थी डिच ड्रेन
शहर के विश्वकर्मा चौक स्थित एसटीपी से करनाल तक डिच ड्रेन इसलिए बनाई गई थी ताकि फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा व केमिकल युक्त पानी पश्चिमी यमुना नहर के पानी में न जाए। इसे रोकने के लिए कई साल पहले 13.71 करोड़ रुपये से यमुनानगर से लेकर जिला करनाल के डबकौली गांव तक डिच ड्रेन का निर्माण किया गया था। जगाधरी में बड़ी संख्या में मेटल फैक्टरियां हैं। फैक्टरियों से जो गंदा पानी निकलता है उसमें केमिकल के अलावा बड़ी मात्रा में मेटल के कण होते हैं। विश्वकर्मा चौक के पास जो एसटीपी लगा है उसके पास ही जगाधरी से आ रहा यह नाला सीधे डिच ड्रेन में गिरता है। कई बार डिच ड्रेन का गेट बंद कर दिया जाता है तो यही केमिकल युक्त पानी सीधे पश्चिमी यमुना नहर में गिरने लगता है।
कई गांवों में लोगों का सांस लेना हुआ मुश्किल
यमुनानगर के भगवानगढ़, पोटली, ठसका, रादौर, घेसपुर, धौला, कांजनू, जुब्बल, खुर्दबन, सुखदासपुर, दामला माजरी, करनाल के धनौरा, कलरी जागीर, मखाला, मखाली, गढ़ी बीरबल, चंद्राव, डबकौली, डेटा सिकलीगर, बीबीपुर ब्राह्मणान, शैयद छपरा सहित अन्य कई गांवों में इस ड्रेन के प्रदूषण का असर देखा जा रहा है। क्षेत्र निवासी समय सिंह, रामकुमार, पंडित सुरेंद्र, प्रवीण कुमार, ईश्वर सैनी ने बताया कि जो गांव डिच ड्रेन के साथ लगते हैं उनमें हर समय बदबू रहती है। जो खेत इसके साथ हैं उनमें फसल नहीं हो पाती। दर्जनों गांवों का भूजल इस ड्रेन ने विषैला कर दिया है। यहां कई लोग कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से जूझ रहे हैं। वह इसकी शिकायत एनजीटी चेयरमैन से भी कर चुके हैं। फिर भी आज तक समाधान नहीं हुआ। ज्यादातर ग्रामीणों के गले खराब रहते हैं। हर कोई पेट की बीमारी से ग्रस्त है।
एसटीपी बनाने की योजना है: सुमित गर्ग
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग यमुनानगर के एक्सईएन सुमित गर्ग का कहना है कि डिच ड्रेन में जगाधरी से आ रहे नाले का पानी जाता है। डिच ड्रेन पर एसटीपी या सीईटीपी बनाने की योजना है। इनके बनते ही ड्रेन में गंदे पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा।