यमुनानगर। नवरात्र के तीसरे दिन जिले के मंदिरों सहित गली चौराहों पर मां भवानी के जयघोष सुनाई दिए। भक्तों ने माता के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की। सुबह श्रद्धालुओं ने मां के सम्मुख पूजन सामग्री अर्पित कर पूजा की। मंगलवार को चौथे दिन माता के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा का विधान है। मां कूष्मांडा के प्रति मान्यता है कि उनकी पूजा करने से सभी रोग दूर होते हैं और व्यक्ति दीर्घायु होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनकी भुजाएं बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल सुशोभित हैं। वहीं दूसरी भुजा में वह सिद्धियों और निधियों से युक्त माला धारण किए हुए हैं। दुष्ट दलन करने वाली मां कूष्मांडा की सवारी सिंह है। उन्होंने बताया कि मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्मांडा ने ही इस सृष्टि की रचना की थी। इसी के चलते इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा व आदिशक्ति भी कहा जाता है।
बाक्स
पूजन कर लगाएं मीठे फलों का भोग
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए साधक को प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत हो स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। सबसे पहले चौकी पर मां की प्रतिमा स्थापित करें। उसके बाद उनके सम्मुख ज्योति प्रज्ज्वलित करें। फिर मां के सम्मुख धूप, दीप, नैवेद्य, पानी, सुपारी व पुष्प अर्पित करें। मां को लाल पुष्प या गुलाब अर्पित किया जाता है। इसके बाद हाथ में पुष्प लेकर मां का ध्यान लगाकर मंत्र का उच्चारण करें।