संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के चुनाव परिणाम बुधवार को आएंगे। इसमें शहर की सरकार (मेयर व 22 वार्ड पार्षद) बनेगी। साथ ही इसके बाद से विकास कार्य भी रफ्तार पकड़ते दिखेंगे। चुनाव संपन्न होने पर आचार संहिता खत्म हो जाएगी। इससे शहर में नए काम शुरू सकेंगे। इनमें करोड़ों रुपये के काम पहले से मंजूर हैं पर आचार संहिता के कारण शुरू नहीं हो पाए।
अब आचार संहिता हटते ही निगम अफसरों की ओर से औपचारिकताएं पूरी कर काम सिरे चढ़ाने की तैयारी है। इनमें नई वैध कॉलोनियों सहित अन्य इलाकों में गलियों-नालियों के निर्माण सहित कई बड़ी विकास परियोजनाएं शामिल हैं। गत चार फरवरी को चुनाव आयोग की ओर से निकाय चुनाव की घोषणा की गई थी। तब से चुनाव संहिता लागू हो गई थी।
इससे नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के करोड़ों रुपये के काम लटक गए। कई नए कामों की अलग-अलग स्तर पर मंजूरी मिल गई थी, जिनमें कई कामों के अनुमान तैयार करने से लेकर ई निविदा भी लग चुकी थी। इसके अलावा काफी काम ऐसे थे, जिनके लिए ठेकेदार या एजेंसियां न मिलने पर अफसरों ने दोबारा ई निविदा लगाई थी या ऐसा करने की तैयारी में थे।
यह सभी काम आचार संहिता लगने से करीब सवा माह अटक गए, जो अब 12 मार्च को चुनाव परिणाम के बाद आचार संहिता हटने पर सिरे चढ़ने की संभावना है। इसके लिए निगम अफसरों की ओर से जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। निगम चुनाव के परिणाम से शहर की नई सरकार बनेगी।
साथ ही नगर निगम के आगामी वित्त वर्ष-2025-26 के बजट भी सामने होगा। इसके लिए नगर निगम की अलग-अलग शाखाओं से आय-व्यय का डाटा जुटाया जा रहा है। शहर के विकास कार्यों पर खर्च की जाने वाली अनुमानित राशि भी बजट में तय होगी। वित्त वर्ष-2024-25 में नगर निगम 257 करोड़ रुपये का बजट बना था, जो इस बार करीब 10 फीसदी तक बढ़ाए जाने की संभावना है।
लटके हैं करीब 15 करोड़ के नए काम
आचार संहिता लगने से नगर निगम के करीब 15 करोड़ रुपये के नए काम लटक गए थे। इनमें नई वैध कॉलोनियों सहित अन्य इलाकों में गलियों-नालियों के निर्माण सहित एलईडी लाइट का सामान लेने, पश्चिमी यमुना नहर पर कैनाल फ्रंट बनाने जैसी परियोजनाएं भी हैं। इनमें कई काम कई माह व साल से लंबित हैं, जिनके होने से संबंधित क्षेत्र सहित शहर के लोगों को बड़ी राहत होगी।
चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद नए काम जल्द शुरू कराने और तय समय अवधि पर पूरे कराने का प्रयास रहेगा। इस संबंध में संबंधित शाखा के अफसरों को दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।