साढौरा। साढौरा नगरपालिका के चुनाव की घोषणा होते ही इसे भंग नपा को भंग करने की मांग जोरशोर से उठी है। लोगों ने नगरनपालिका भंग करने को लेकर पहले मनोकामना मंदिर मैदान में शांतिपूर्ण ढंग से बैठक की। बैठक में सभी ने एकमत से नगरपालिका को भंग करने की मांग उठाई। इसके बाद कस्बा में रोष मार्च निकाला। जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। दुकानदारों ने भी लोगों के रोष मार्च का समर्थन किया।
समाजसेवी अशोक मेहता, मंगत राम सैनी ने कहा कि ग्राम पंचायत से नगरपालिका का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय लोगों को काफी उम्मीदें थी, लेकिन सुविधाएं मिलने के बजाय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई। नगरपालिका टैक्स के रूप में लोगों से पैसे तो ले रही है, मगर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा। नगरपालिका भंग करवाने को लेकर बनी पंचायत संघर्ष समिति ने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं नगरपालिका भंग करवाने के लिए मुख्यमंत्री, राज्यमंत्री, डीसी के अलावा कई मंत्रियों व अधिकारियों को ज्ञापन दिए जाएंगे।
नपा के खिलाफ है जनता
अशोक मेहता, श्याम लाल अग्रवाल, रमेश जैन, दिलावर हुसैन, पवन बक्शी ने कहा कि कस्बावासियों ने सरकार से नगरपालिका भंग करवाने के लिए नपा डिनोटिफाइड करने की मांग की है। कस्बे का हर व्यक्ति नगरपालिका बनने के खिलाफ है। इसको लेकर सरकार को सर्वे करवाना चाहिए था, लेकिन कस्बावासियों पर नगरपालिका बेवजह थोपी जा रही है।
2018 में हुई थी घोषणा
वर्ष 2018 में साढौरा को नगरपालिका बनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से ही नगरपालिका में टैक्स के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ले लिए गए। जबकि आज तक नगरपालिका ने कोई भी विकास का काम नहीं किया। नगरपालिका के चलते सभी सड़कें व गलियां खस्ताहाल में पड़ी हैं। कस्बावासी पंचायत के पक्ष में है। यहां पर नगरपालिका के नहीं बल्कि पंचायत के ही चुनाव कराए जाएं।
हाईकोर्ट की लेंगे शरण
पंचायत संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इसको लेकर हाई कोर्ट की शरण ली जाएगी। कस्बा की आबादी करीब 15 हजार है। इसके बावजूद यहां पर लोगों की मर्जी के खिलाफ एक दो लोगों के कहने पर नगरपालिका की घोषणा कर दी गई थी। यह सरासर गलत है। नगरपालिका भंग होने तक उनके प्रयास जारी रहेंगे। वहीं इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहेगी।